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मप्र में और तेज सुनाई देगी बाघों की दहाड़ : सीएम मोहन दावा- अगले साल तक 4 अंकों में पहुंच जाएगी संख्या, वर्तमान में हैं 785

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 29, 2026
10:57 AM
सीएम मोहन दावा- अगले साल तक 4 अंकों में पहुंच जाएगी संख्या, वर्तमान में हैं 785

भोपाल। मध्यप्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी मजबूत पहचान कायम की है। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्ष में होने वाली नई गणना में यह आंकड़ा 1000 के पार पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और मध्यप्रदेश इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का गौरव ऐसे ही नहीं मिला है, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संरक्षण योजनाएं और जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

53 साल में बदली तस्वीर, दहाई से 785 तक पहुंची बाघों की संख्या

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 53 वर्ष पहले प्रदेश में बाघों की संख्या दहाई के आंकड़े तक सीमित थी। संरक्षण के लगातार प्रयासों का परिणाम रहा कि वर्ष 2016 में बाघों की संख्या लगभग 250 तक पहुंची और वर्ष 2022 की गणना में यह बढ़कर 785 हो गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। बाघों के साथ-साथ चीता, घड़ियाल, हाथी और जंगली भैंसे जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी प्रदेश में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।

वन्यजीव संरक्षण पर कई पुस्तकों और अभियानों का शुभारंभ

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और वन विभाग द्वारा तैयार कई प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र की घास प्रजातियों पर आधारित पुस्तक, सतपुड़ा की तितलियों पर केंद्रित फ्लटरिंग ज्वेल्स ऑफ सतपुड़ा, वन्यजीवन रेस्क्यू संकलन, मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और पेंच टाइगर रिजर्व की जैव विविधता से जुड़ी पुस्तकें शामिल रहीं। मुख्यमंत्री ने रातापानी टाइगर रिजर्व और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लोगो का भी विमोचन किया।

जनभागीदारी से संरक्षण को मिलेगी नई ताकत

मुख्यमंत्री ने ‘एक जन-एक पत्ती - जनभागीदारी, संरक्षण की शक्ति’ अभियान में भी भाग लिया। इस अभियान के तहत उन्होंने पत्ती के आकार की सिरेमिक टाइल पर बाघ का चित्र उकेरा। इन टाइलों का उपयोग वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के हिनोती पर्यटन द्वार को सजाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन और वन्यजीव संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। स्थानीय ग्रामीणों, वन समितियों और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से संरक्षण अभियान को मजबूती मिल रही है।

घड़ियाल, जंगली भैंसे और हाथियों के संरक्षण में बड़ी उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबल नदी में घड़ियाल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। कूनो क्षेत्र की नदियों में भी घड़ियाल छोड़े गए हैं। उन्होंने बताया कि 100 वर्ष पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसे के पुनर्वास का कार्य भी प्रदेश में सफलतापूर्वक किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक हाथियों से जुड़े संकट की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन वन विभाग ने आधुनिक तकनीक और नई रणनीतियों के जरिए इस चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया है। जल्द ही प्रदेश में गैंडे लाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जाएंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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