रीवा का गौरव सौरभ इसरो में बने वैज्ञानिक : चंद्रयान को देखकर ठानी थी उड़ान, छोटे से गांव से निकल छुआ आसमां

रीवा । कहते हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती—और अगर इरादे मजबूत हों, तो एक छोटे से गांव से निकलकर भी इंसान आसमान छू सकता है। मध्यप्रदेश के रीवा जिले की जवा तहसील के छोटे से गांव पुरौना के युवा सौरभ द्विवेदी ने यही कर दिखाया है। उनका चयन देश की प्रतिष्ठित संस्था भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के रूप में हुआ है, जो न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है।
साधारण शुरुआत, असाधारण सफर
सौरभ एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता शैलेन्द्र द्विवेदी एक शिक्षक हैं, जिन्होंने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी, जबकि उनकी मां गीता द्विवेदी ने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। सौरभ की शुरुआती पढ़ाई शासकीय मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-एक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से बीटेक और फिर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया।
चंद्रयान-2 से मिली प्रेरणा
सौरभ के जीवन में एक अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को देखा। उस ऐतिहासिक पल ने उनके भीतर एक नई ऊर्जा और सपना जगाया। उन्होंने उसी समय तय कर लिया था कि एक दिन वे भी देश के अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनेंगे। उनकी यह दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत आज उन्हें इस मुकाम तक ले आई है।
गांव में खुशी की लहर
सौरभ की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे गांव पुरौना और रीवा जिले के लिए गर्व का क्षण है। उनके चयन की खबर मिलते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया। हर कोई उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर कर रहा है और उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
सौरभ द्विवेदी की कहानी यह साबित करती है कि सफलता के लिए बड़े शहर या संसाधन जरूरी नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास जरूरी हैं। अब वे ISRO में वैज्ञानिक के रूप में देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में योगदान देंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेंगे।
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