सत्ता के साये में गुंडाराज : दांत तोड़ दूंगा, जिंदा गाड़ दूंगा, मंत्री के भाई ने महिला अधिकारी को खुली धमकी दे उड़ाई कानून की धज्जियां

अलीराजपुर। मध्यप्रदेश में सत्ता से जुड़े लोगों के परिजनों की दबंगई एक बार फिर सामने आई है। मप्र सरकार में मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इंदर सिंह चौहान ने जनपद पंचायत कार्यालय में महिला अधिकारी को जिस तरह धमकाया, उसने प्रशासनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना 22 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, जब जनपद पंचायत की सीईओ प्रिया काग अपने कार्यालय पहुंचीं और कन्या विवाह योजना के तहत गलत आवेदनों को निरस्त किया। बस इसी बात पर बवाल खड़ा हो गया।
गुस्से में बेकाबू इंदर चौहान ने न केवल अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि खुलेआम धमकी दीकृ“तेरे दांत तोड़ दूंगा, तुझे यहीं जिंदा गाड़ दूंगा।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि “यहां सब मेरी मर्जी से होगा,” जो सीधे-सीधे प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। यह घटना बताती है कि किस तरह सत्ता की छाया में कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा को चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही घटना
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आरोपी सीईओ की ओर मारने के लिए बढ़ा। मौके पर मौजूद लेखाधिकारी सावन भिंडे ने बीच-बचाव कर किसी तरह हालात संभाले। अगर समय पर हस्तक्षेप न होता, तो मामला गंभीर हिंसा में बदल सकता था। यह घटना सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश करती है।
पीड़ित अधिकारी का दर्द
पीड़ित अधिकारी प्रिया काग ने साफ कहा कि वह अपने ही कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें धमकाया गया, रास्ता रोका गया और जान से मारने की कोशिश की गई। यह बयान प्रशासनिक तंत्र में भय के माहौल को उजागर करता है।
आरोपी को कुछ सयम में ही मिली जमानत पर उठे सवाल
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया, लेकिन कुछ ही समय में उसे जमानत मिल गई। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसे मामलों में सख्ती सिर्फ दिखावे तक सीमित है?
पल्ला झाड़ जिम्मेदारी से बचे माननीय
मामले पर नागर सिंह चौहान ने कहा कि उनका अपने भाई से वर्षों से कोई संबंध नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ पल्ला झाड़ लेने से जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, खासकर जब आरोपी सत्ता से जुड़े परिवार का हिस्सा हो?
सत्ता, रिश्ते और दबंगईकृकब रुकेगा यह खेल?
यह पूरा मामला सिर्फ एक व्यक्ति की बदतमीजी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है जहां सत्ता के रिश्ते कानून से ऊपर समझे जाते हैं। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून की साख कब मजबूत होगी?
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