समुद्री क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि : शिप रीसाइक्लिंग का सरताज बना भारत, 5 साल पहले ही हासिल कर लिया बड़ा लक्ष्य

नई दिल्ली। समुद्री क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत दुनिया का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय समय से करीब पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत दुनिया में जहाज रीसाइक्लिंग के मामले में पहले स्थान पर रहा। वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी भी बढ़कर 35.4 प्रतिशत हो गई है।
एक साल में 60 फीसदी बढ़ी रीसाइक्लिंग क्षमता
व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 में 30.1 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 35.4 प्रतिशत हो गई। यह वृद्धि भारत के समुद्री उद्योग के साथ-साथ जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
भारत में जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2024 में जहां 1.86 मिलियन सकल टन जहाजों का रीसाइक्लिंग हुआ था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.99 मिलियन GT पहुंच गया। यानी एक साल में रीसाइक्लिंग मात्रा में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अलंग-सोसिया बना भारत की ताकत
गुजरात का अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग क्लस्टर भारत की इस सफलता का सबसे बड़ा केंद्र है। इसे दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग केंद्रों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की जहाज रीसाइक्लिंग गतिविधियों में अलंग-सोसिया की हिस्सेदारी करीब 98 प्रतिशत है।
क्लस्टर की वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता करीब 6 मिलियन जीटी है। यहां जहाजों के पुनर्चक्रण से हर साल करीब 3.50 मिलियन मीट्रिक टन इस्पात तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों के अतिरिक्त दोहन की जरूरत नहीं पड़ती। इस पूरे तंत्र को अधिकृत रीसाइक्लिंग यार्ड, स्टील री-रोलिंग मिल और अपशिष्ट प्रबंधन ढांचा मजबूती देता है।
अब क्षमता दोगुनी करने की तैयारी
भारत अब अपनी जहाज रीसाइक्लिंग क्षमता को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर करीब 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (एलडीटी) करना है। इसके लिए अलंग के जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड के विस्तार की योजना तैयार की गई है। भविष्य की मांग को देखते हुए व्यापक मास्टर प्लान बनाया गया है, जिसमें बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने पर जोर है।
1.5 लाख से ज्यादा श्रमिकों को प्रशिक्षण
अलंग-सोसिया में सुरक्षा और श्रमिक कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां सुरक्षा प्रशिक्षण एवं श्रम कल्याण संस्थान के माध्यम से 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें व्यावसायिक सुरक्षा, खतरनाक सामग्री का प्रबंधन और आपातकालीन स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग शामिल है। इसके अलावा कोलकाता स्थित अमर लौह उद्योग और केरल के स्टील इंडस्ट्रियल्स केरल लिमिटेड में भी जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड मौजूद हैं। भारत की बढ़ती क्षमता अब उसे वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग में एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित कर रही है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
