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दो बेटियों ने पेश की मिसाल : फादर्स डे से ठीक पहले किडनी और लीवर देकर पिता को दी नई जिंदगी

अभिलाषा कनाडे

अभिलाषा कनाडे

Jun 18, 2026
10:58 AM
फादर्स डे से ठीक पहले किडनी और लीवर देकर पिता को दी नई जिंदगी

गाजियाबाद : बेटियाँ परिवार की शान और अपने पिता की सबसे लाड़ली होती हैं। दो बेटियों ने इसे साबित कर दिया है। गाजियाबाद के मोरटा गांव में फादर्स डे से पहले दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाकर एक अनोखी मिसाल कायम की है। बड़ी बेटी रिषिका ने अपनी एक किडनी दान की, जबकि छोटी बेटी खुशी ने अपने लीवर का एक हिस्सा देकर पिता को नया जीवन दिया।

पिता की ढाल बनकर खड़ी हुईं बेटियां

गाजियाबाद के मोरटा गांव के निवासी 45 वर्षीय जयंत त्यागी काफी समय से स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान थे। शुरू में उन्होंने इसे सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराया, लेकिन करीब तीन महीने पहले उनकी हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। पेट से जुड़ी गंभीर दिक्कतों के बाद जब उन्होंने अस्पताल में पूरी जांच कराई, तो डॉक्टरों ने बताया कि उनकी किडनी और लीवर दोनों बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं और उन्हें बचाने के लिए जल्दी से जल्दी ट्रांसप्लांट करना जरूरी है। जयंत त्यागी जब जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब उनकी दोनों बेटियां उनके लिए ढाल बनकर खड़ी हो गईं।

तोहफे के रुप में दी नई जिंदगी

फादर्स डे से ठीक पहले दोनों बेटियों ने अपने पिता को सबसे अनमोल तोहफे के रुप में नई जिंदगी दे दी। अपने पिता के प्रति उनके प्यार और समर्पण ने सभी को भावुक कर दिया। बड़ी बेटी ऋषिका ने अपने पिता को बचाने के लिए अपनी एक किडनी दे दी, जिसकी शादी कुछ ही महीनों में होने वाली है। ऋषिका ने जब इसकी जानकारी ससुराल पक्ष को दी उन्होने भी इस बात की सराहना करते हुए पूरा समर्थन दिया। तो वहीं बीटेक के पहले साल में पढ़ रही छोटी बेटी खुशी ने भी अपना लीवर का हिस्सा दान करने का फैसला किया।

नोएडा के निजी अस्पताल में हुआ ट्रांसप्लांट

नोएडा  के एक निजी अस्पताल में दोनों बेटियों और संजय त्यागी का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। जहां अभी तीनों की हालत स्थिर है। परिजनों ने बताया कि संजय त्यागी की बीमारी का पता लगने के बाद परिवार के कई सदस्यों की जांच की गई तभी दोनों बेटियों कि जांच रिपोर्ट बिल्कुल सटीक बैठी। जिसके बाद दोनों बेटियों की काउंसलिंग भी की जिसमें दोनों बेटियां अपने निर्णय पर मजबूती से टिकी रहीं। डॉक्टरों का कहना है कि सभी की रिकवरी अच्छी चल रही है और जल्द ही दोनों बेटियों को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।

यह कहानी एक बार फिर साबित करती है कि बेटियां केवल परिवार की शान नहीं होतीं, बल्कि मुश्किल वक्त में सबसे बड़ी ताकत और उम्मीद भी बन जाती हैं।

अभिलाषा कनाडे
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अभिलाषा कनाडे

खबरी दुनिया की ऑल राउंडर। टीवी जर्नलिज़्म में एक दशक का सफर पूरा कर रही हैं। टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया का प्रगाढ़ अनुभव।

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