ट्विशा शर्मा मौत मामला : हाईकोर्ट से गिरिबाला सिंह को नोटिस, 27 को होगी सुनवाई, जांच में असहयोग और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप

जबलपुर। राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में कानूनी लड़ाई अब और तेज हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम कदम उठाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से मिली उनकी अग्रिम जमानत को निरस्त करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति देवनारायण सिंह की एकलपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में जल्दबाजी में फैसला लेने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पीड़ित पक्ष की ओर से अलग से याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 27 मई को तय की है।
12 मई को संदिग्ध हालात में मिली थी ट्विशा की लाश
गौरतलब है कि 33 वर्षीय मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी हुई मिली थीं। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं। वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा लंबे समय से नशे की लत से परेशान थीं।
जमानत रद्द कराने के लिए दो अलग-अलग याचिकाएं
पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट में दो अलग-अलग आवेदन लगाए गए हैं। पहला आवेदन मृतका के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से दायर किया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस आवेदन का नोटिस अभी तक विधिवत तामील नहीं हो पाया था, जिसके बाद कोर्ट में ही गिरिबाला सिंह के वकील ने नोटिस प्राप्त किया।
दूसरी याचिका राज्य सरकार की ओर से दायर की गई है। इस आवेदन में पुलिस प्रशासन ने आरोप लगाया है कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और लगातार मीडिया में बयानबाजी कर रही हैं, जो जमानत की शर्तों का उल्लंघन है।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप
मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर केस से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने मामले को सुनवाई योग्य माना है।
अब पूरे प्रदेश की नजर 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां हाईकोर्ट यह तय करेगा कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रहेगी या उसे रद्द किया जाएगा।
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