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दुनिया की सबसे अहम समुद्री राह पर ईरान का पहरा : अब कैसे पार होगा होर्मुज, 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना होगा अनिवार्य

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 20, 2026
07:23 AM
अब कैसे पार होगा होर्मुज, 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद तेहरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नई अनुमति व्यवस्था लागू कर दी है। अब कोई भी जहाज सीधे इस रास्ते से नहीं गुजर सकेगा, बल्कि उसे पहले अनुमति प्राप्त करनी होगी। ईरान ने इसके लिए नई संस्था ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (पीजीएसए) को जिम्मेदारी सौंपी है।

पहले अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत जहाज बिना किसी विशेष अनुमति के होर्मुज से गुजर सकते थे, लेकिन नई व्यवस्था में प्रत्येक जहाज को पहले आवेदन करना होगा। पीजीएसए को जहाज की पहचान, कार्गो, मालिकाना जानकारी, बीमा दस्तावेज और यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी देनी होगी। आवेदन स्वीकृत होने के बाद ही जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। ईरान का कहना है कि यह कदम समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, यातायात को नियंत्रित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

48 घंटे पहले देनी होगी पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत जहाजों को होर्मुज क्षेत्र में पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना अनिवार्य होगा। जहाज के झंडे, आईएमओ नंबर, चालक दल की संख्या, राष्ट्रीयता और माल की विस्तृत जानकारी भी देनी होगी। यदि जानकारी अधूरी पाई जाती है तो आवेदन खारिज किया जा सकता है। ईरान का दावा है कि क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और नौवहन जोखिमों को देखते हुए प्रत्येक जहाज के लिए अलग मार्ग और समय निर्धारित करना जरूरी हो गया है।

60 दिन तक राहत, फिर लग सकता है शुल्क

अमेरिका-ईरान समझौते के तहत शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सुरक्षा, नौवहन सहायता, पर्यावरण संरक्षण और बीमा जैसी सेवाओं का खर्च फिलहाल ईरान वहन करेगा। हालांकि तेहरान ने संकेत दिया है कि यह छूट अस्थायी है और भविष्य में इन सेवाओं के लिए शुल्क वसूला जा सकता है।

वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में ईरान के इस फैसले को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुमति प्रक्रिया और संभावित शुल्क व्यवस्था लंबे समय तक लागू रहती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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