भोपाल मास्टर प्लान पर सियासी बयानबाजी शुरू : कांग्रेस ने ड्राफ्ट पर उठाए सवाल, भाजपा ने बताया विकास का रोडमैप

भोपाल। भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट के सामने आने के बाद भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां मास्टर प्लान को लेकर कई सवाल उठाते हुए विस्तृत समीक्षा और आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही है, वहीं भाजपा ने इसे व्यापक समीक्षा के बाद तैयार किया गया विकास का खाका बताया है। दोनों दलों की ओर से ड्राफ्ट के अलग-अलग पहलुओं को लेकर अपनी-अपनी बातें सामने रखी गई हैं।
कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा ने कहा कि पार्टी पहले मास्टर प्लान के पूरे ड्राफ्ट का अध्ययन करेगी। इसके बाद उसमें जो भी आवश्यक आपत्तियां होंगी, उन्हें नियमानुसार दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करीब 31 साल से भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान नहीं आया था, ऐसे में अब 2047 तक की योजना बनाने से पहले मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर भी स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना में करीब 100 गांवों को शामिल करने की बात है, ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित किसानों की जमीन पर क्या प्रभाव पड़ेगा और उनके हितों की सुरक्षा किस तरह की जाएगी।
सीलिंग नोटिस वाले व्यावसायिक केंद्रों पर भी सवाल
कांग्रेस ने उन व्यावसायिक केंद्रों को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, जिन्हें सीलिंग के नोटिस दिए गए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि नए मास्टर प्लान में इन क्षेत्रों के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं और भविष्य में उनकी स्थिति क्या होगी। इसके अलावा मिक्स्ड लैंड यूज पॉलिसी को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। पार्टी का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर और किन नियमों के तहत दी जाएगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
भाजपा ने बताया व्यापक समीक्षा के बाद तैयार ड्राफ्ट
वहीं भाजपा ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का बचाव करते हुए कहा कि इसे अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर पूरी समीक्षा के बाद जारी किया गया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने कहा कि योजना तैयार करते समय भोपाल की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी ध्यान में रखा गया है।
जनता और विशेषज्ञों से मांगे जाएंगे सुझाव
भाजपा ने कहा कि अब ड्राफ्ट पर विशेषज्ञों और आम जनता की राय सामने आएगी। लोगों को योजना का अध्ययन कर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए, ताकि अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में विभिन्न पक्षों को शामिल किया जा सके। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस ने अपने सवालों के जरिए सरकार से मास्टर प्लान के विभिन्न प्रावधानों पर स्पष्टता मांगी है। अब ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किन बिंदुओं पर संशोधन किया जाता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
