अब दुनिया को बेचने का समय! : राजनाथ का रक्षा क्षेत्र को बड़ा संदेश, कहा- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई स्वदेशी ताकत

नई दिल्ली। भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता को अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक ताकत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को स्पष्ट कहा कि भारत को अब यह सोच बदलनी होगी कि उसे दुनिया से क्या खरीदना है। लक्ष्य यह होना चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। उन्होंने स्वदेशी हथियार प्रणालियों को देश की रणनीतिक मजबूती का आधार बताते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रह सकता।
राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वदेशी रक्षा तकनीक की अहमियत का उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आया। इस अभियान में दुनिया ने भारतीय हथियार प्रणालियों और उनकी क्षमता को देखा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता अब सिर्फ सरकारी नीति नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने वाली ताकत बन चुकी है।
रक्षामंत्री ने यह बात पश्चिम बंगाल में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी पांच बड़ी परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास के दौरान कही। करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश की जहाज निर्माण और धातुकर्म क्षमता को मजबूत करना है।
जहाज निर्माण में बढ़ेगी भारत की ताकत
इन परियोजनाओं में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की तीन नई सुविधाएं शामिल हैं। इनमें रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि जीआरएसई के पास जहाज निर्माण का लंबा अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधन मौजूद है। उन्होंने संस्थान से घरेलू जरूरतों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती से प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा रक्षा और औद्योगिक उत्पादन तंत्र तैयार करना होना चाहिए, जहां गुणवत्ता देखकर दुनिया भरोसा करे, कीमत देखकर खरीदारी करे और समय पर आपूर्ति देखकर दोबारा ऑर्डर दे।
विदेशी बाजार में भी बढ़ेगा दबदबा
रक्षामंत्री ने बताया कि जीआरएसई भारतीय नौसेना के लिए जहाज बनाने के साथ एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज भी तैयार कर रहा है। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की सोच का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत यदि हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों की मरम्मत और ओवरहॉल का बड़ा केंद्र बनता है तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
यंत्र इंडिया की नई तकनीकी क्षमता
पांच परियोजनाओं में यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाएं भी शामिल हैं। इनमें 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट शामिल हैं। इनसे रक्षा उत्पादन के लिए जरूरी उन्नत धातु और औद्योगिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय, अनुसंधान संस्थान, सार्वजनिक उपक्रम और निजी क्षेत्र मिलकर भारतीय सेनाओं को अधिक से अधिक स्वदेशी प्रणालियों से लैस करने के लिए काम करेंगे। उनके मुताबिक, इन परियोजनाओं से रक्षा उत्पादन के साथ पश्चिम बंगाल में एमएसएमई, सहयोगी उद्योगों और रोजगार के अवसरों को भी गति मिलेगी।
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