40 साल बाद वापसी : बांधवगढ़ में फिर बसी बारहसिंघों की दुनिया, संख्या बढ़कर 64 पहुंची

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। करीब 40 साल पहले बांधवगढ़ से विलुप्त हो चुके दुर्लभ हार्ड ग्राउंड बारहसिंघा को दोबारा यहां बसाने की कोशिश रंग ला रही है। प्रोजेक्ट बारहसिंघा के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाए गए बारहसिंघों की संख्या अब बढ़कर 64 हो गई है।
बारहसिंघों की संख्या में हुई यह बढ़ोतरी बांधवगढ़ में इस दुर्लभ प्रजाति की वापसी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। वन विभाग अब इस प्रजाति के संरक्षण और कुनबे को बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
40 साल बाद बांधवगढ़ में वापसी
बताया जा रहा है कि करीब चार दशक पहले बारहसिंघा बांधवगढ़ से पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। इसके बाद भारत सरकार के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने इस दुर्लभ वन्यजीव को दोबारा बांधवगढ़ में बसाने की योजना तैयार की।
इसी योजना के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से 48 हार्ड ग्राउंड बारहसिंघों को बांधवगढ़ लाकर बसाया गया था। इनमें करीब 16 नर, 30 मादा और 2 शावक शामिल थे। इनके संरक्षण और प्रजनन के लिए बांधवगढ़ के मगधी क्षेत्र में दलदली इलाके के बीच करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष बाड़ा तैयार किया गया है।
यहीं बारहसिंघों की लगातार निगरानी की जा रही है और उनके स्वास्थ्य, व्यवहार तथा प्रजनन पर वन विभाग की टीम नजर बनाए हुए है। अब इनकी संख्या बढ़कर 64 पहुंच गई है।
बांधवगढ़ में हार्ड ग्राउंड बारहसिंघा
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के मुताबिक, भारत में बारहसिंघों की तीन प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं। बांधवगढ़ में कान्हा से लाए गए बारहसिंघा हार्ड ग्राउंड स्वैम्प डियर हैं।
यह प्रजाति पहले मुख्य रूप से कान्हा टाइगर रिजर्व में ही पाई जाती थी। अब इसे अन्य उपयुक्त संरक्षित क्षेत्रों में भी बसाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। बांधवगढ़ के साथ सतपुड़ा जैसे क्षेत्रों में भी इस प्रजाति के संरक्षण की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
100 बारहसिंघों को लाने का लक्ष्य
प्रोजेक्ट बारहसिंघा के तहत वन विभाग का लक्ष्य कान्हा से कुल 100 बारहसिंघों को बांधवगढ़ लाना है। निर्धारित संख्या पूरी होने और बारहसिंघों के नए वातावरण में पर्याप्त रूप से अनुकूलित हो जाने के बाद उन्हें विशेष बाड़े से निकालकर प्राकृतिक जंगल में छोड़े जाने की योजना है। इसके बाद बारहसिंघे बांधवगढ़ के जंगल में स्वच्छंद विचरण कर सकेंगे और धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक आबादी तैयार कर सकेंगे। वन विभाग को उम्मीद है कि संरक्षण और प्रजनन के इन प्रयासों के चलते आने वाले वर्षों में बांधवगढ़ एक बार फिर बारहसिंघों का सुरक्षित और समृद्ध प्राकृतिक आवास बन सकेगा।
नीलम अहिरवार
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