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कूनो में फिर गूंजी चीतों की दहाड़ : भारत में जन्मी केजेपी-21 ने पांच शावकों को दिया जन्म, संख्या बढ़कर हुई 60

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 05, 2026
09:58 AM
भारत में जन्मी केजेपी-21 ने पांच शावकों को दिया जन्म, संख्या बढ़कर हुई 60

भोपाल। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्म लेने वाली जन्मी 32 माह की मादा चीता केजेपी-21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। केजेपी-21 भारत में जन्मी तीसरी ऐसी मादा चीता बन गई है, जिसने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मुखी और केजीपी-12 नामक मादा चीताएं भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं। पांच नन्हें शावकों के जन्म लेने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है।

बोत्सवाना की नई वंशावली की भारत में शुरुआत

चीतों की नई पीढ़ी के जन्म को देश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कूनो में चीतों के स्वास्थ्य, गतिविधियों और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पांचों शावकों के जन्म के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। इन शावकों के पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। इस तरह इन शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना की वंशावली की शुरुआत हुई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों की आबादी में अलग-अलग वंशावलियों का समावेश आनुवंशिक विविधता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे भारत में चीतों की आबादी को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के प्रयासों को भी बल मिलने की उम्मीद है।

चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिली नई मजबूती

कूनो की धरती पर पांच नन्हे शावकों का जन्म चीता पुनर्स्थापना अभियान की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उपलब्धि वन विभाग, पशु चिकित्सकों, मैदानी कर्मचारियों और संरक्षण दल के लगातार प्रयासों को भी दर्शाती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस खुशी के अवसर पर चीता संरक्षण से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी कर्मचारियों और पूरी प्रबंधन टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के समर्पण और निरंतर प्रयासों से भारत में चीतों की संख्या बढ़ाने का अभियान आगे बढ़ रहा है।

कूनो में पांच नन्हे शावकों के आगमन से वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई उम्मीद मिली है। चीतों की बढ़ती संख्या भारत में इस विलुप्त हो चुकी प्रजाति को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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