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उज्जैन के मंदिर में होता है त्रिकाल पूजन : नागपंचमी पर जानिए कैसे करें नागदेवता की पूजा, नागचंद्रेश्वर मंदिर में साल में एक बार क्यों होते हैं दर्शन

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Aug 16, 2026
11:10 AM
नागपंचमी पर जानिए कैसे करें नागदेवता की पूजा, नागचंद्रेश्वर मंदिर में साल में एक बार क्यों होते हैं दर्शन

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इसी पवित्र महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नागपंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व नागदेवता के सम्मान, पूजा और संरक्षण से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी के दिन नागदेवता की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं कुंडली में कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के लिए भी नागपंचमी के दिन पूजा को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नागपंचमी पर कैसे करें पूजा?

नागपंचमी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में नागदेवता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जा सकती है। अगर नागदेवता की प्रतिमा उपलब्ध नहीं है, तो आटे से सांप की आकृति बनाकर भी पूजा करने की परंपरा है।पूजा के दौरान नागदेवता को जल, दूध, हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद ‘ॐ नागदेवाय नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है। श्रद्धालु नागपंचमी की कथा सुनते हैं और पूजा के अंत में आरती करते हैं।मान्यताओं के अनुसार, नागों को सीधे दूध पिलाने के बजाय दूध से स्नान कराने की परंपरा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर क्यों है खास?

नागपंचमी के अवसर पर उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी पूजा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।महाकाल मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, मध्य में ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर भगवान नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं। नागचंद्रेश्वर के दर्शन श्रद्धालुओं को साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन होते हैं।

साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं मंदिर के पट

नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं। बाकी 364 दिन मंदिर के पट बंद रहते हैं और बाहर से ही प्रतीकात्मक पूजा-अर्चना की जाती है।धार्मिक मान्यता है कि भगवान नागचंद्रेश्वर के आसपास तक्षक नाग का पहरा रहता है, इसलिए मंदिर के कपाट पूरे साल बंद रहते हैं। नागपंचमी के दिन करीब 24 घंटे के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं और इसी दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलता है। मंदिर की पूजा परंपरा महानिर्वाणी अखाड़े से जुड़ी हुई है। नागपंचमी के दिन पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। पर्व समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट दोबारा बंद कर दिए जाते हैं।इसके बाद सालभर मंदिर के मुख्य द्वार और सीढ़ियों पर भगवान की प्रतीकात्मक पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के दौरान भी दूर से भगवान को पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में विराजित है अद्भुत प्रतिमा

नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती नागों की शैया पर विराजित दिखाई देते हैं।भगवान नागचंद्रेश्वर सात फनों वाले नाग से सुशोभित हैं। मान्यता है कि यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है और इसे नेपाल से उज्जैन लाया गया था।इस मंदिर में भक्तों को नागदेवता के दो स्वरूपों के दर्शन होते हैं। मंदिर के अग्रभाग में भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा विराजमान है, जबकि मंदिर के भीतर नागचंद्रेश्वर शिवलिंग स्वरूप में भी पूजे जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में होती है त्रिकाल पूजा

नागपंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर में त्रिकाल पूजा की परंपरा है। त्रिकाल पूजा यानी दिन में तीन अलग-अलग समय पर विशेष पूजा-अर्चना।

पहली पूजा: नागपंचमी की मध्यरात्रि 12 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है।

दूसरी पूजा: नागपंचमी के दिन दोपहर 12 बजे शासन की ओर से की जाती है। यह परंपरा रियासत काल से चली आ रही है।

तीसरी पूजा: नागपंचमी की शाम करीब 7:30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद की जाती है।

इसके बाद मध्यरात्रि में आरती होने के बाद मंदिर के कपाट फिर से एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर के दर्शन का महत्व

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनूठी परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले इस मंदिर में नागपंचमी के दिन दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, नागपंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजा करने से कुंडली संबंधी दोषों के प्रभाव से राहत मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होने की कामना की जाती है। नागपंचमी का पर्व केवल नागदेवता की पूजा का अवसर नहीं, बल्कि भगवान शिव, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देता है।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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