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नवरात्रि का छठा दिन : मां कात्यायनी की आराधना से मिलेगा सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद, बेटियों के सम्मान का भी है विशेष महत्व

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 16, 2026
06:05 AM
मां कात्यायनी की आराधना से मिलेगा सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद, बेटियों के सम्मान का भी है विशेष महत्व

शारदीय नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस, धर्म और न्याय की प्रतीक हैं। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से माता की आराधना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। मां कात्यायनी की उपासना भक्तों को बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने, धर्म के मार्ग पर चलने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती है।

महर्षि कात्यायन की तपस्या से जुड़ी है माता की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। माता के इस स्वरूप की कथा भक्ति, तपस्या और समर्पण के महत्व को दर्शाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बेटियों के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों का संदेश

मां कात्यायनी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में पिता के कुल से उनके संबंध का भी उल्लेख मिलता है। इस प्रसंग को बेटियों के अपने परिवार के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि बेटियां परिवार की प्रतिष्ठा, संस्कार और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समाज में बेटियों के सम्मान और उनके योगदान को स्वीकार करना भी इसी भावना का हिस्सा है।

नवरात्रि छठा दिन:इस मंत्र से करें मां कात्यायनी की उपासना, दूर होंगे सारे  कष्ट - Navratri 2017 Sixth Day Worship Of Maa Katyayani And Puja Mantra  Method - Amar Ujala Hindi News Live

ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा

नवरात्र के छठे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें। माता को फूल, रोली, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार व्रत और विशेष पूजा भी करते हैं।

ज्ञान, बुद्धि और सद्बुद्धि की भी करें कामना

नवरात्र की छठी तिथि पर मां कात्यायनी की आराधना के साथ ज्ञान और विवेक के महत्व को भी याद किया जाता है। विद्यार्थी पढ़ाई में एकाग्रता, सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। इस अवसर पर देवी स्तुति का पाठ किया जाता है-

“या देवी सर्वभूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

नवरात्र का यह पावन अवसर श्रद्धालुओं को शक्ति, भक्ति, साहस और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भक्त मां कात्यायनी से अपने परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना करेंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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