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सोशल मीडिया तय नहीं करता प्लेइंग इलेवन : वैभव के चयन पर हेड कोच का बड़ा बयान, बोले- प्रतिभा के बाद भी मौके का करना पड़ता है इंतजार

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 05, 2026
08:11 AM
वैभव के चयन पर हेड कोच का बड़ा बयान, बोले- प्रतिभा के बाद भी मौके का करना पड़ता है इंतजार

नई दिल्ली। भारत-वेस्टइंडीज के बीच मंगलवार से टी-20 सीरीज का आगाज होने जा रहा है। प्रबंन का फोकस टीम संयोजन पर है। टीम चयन को लेकर चल रही मथापच्ची के बीच टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रतिभा के बावजूद हर खिलाड़ी को मौके का इंतजार करना पड़ता है।

गंभीर ने यह भी साफ किया कि टीम की प्लेइंग इलेवन का फैसला सोशल मीडिया या बाहरी चर्चाओं के आधार पर नहीं, बल्कि टीम संयोजन, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मैच जिताने की क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाता है।

गंभीर ने समझाया क्यों करना पड़ा इंतजार

गौतम गंभीर ने ‘जियोस्टार’ से बातचीत में बताया कि वैभव के साथ इस विषय पर उनकी बात हुई थी। गंभीर के मुताबिक, उन्होंने युवा बल्लेबाज को समझाया कि टीम में लंबे समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों की मौजूदगी में कभी-कभी प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि प्लेइंग इलेवन का चयन बाहर की चर्चाओं से प्रभावित नहीं होता। टीम प्रबंधन यह देखता है कि मौजूदा परिस्थितियों में कौन सा संयोजन टीम को मैच जिताने की सबसे बेहतर स्थिति में रख सकता है।

अभिषेक और संजू को बाहर करना आसान नहीं

गंभीर ने टीम चयन के पीछे की चुनौती को समझाते हुए कहा कि यदि वैभव को मौका देने के लिए ऐसे खिलाड़ी को बाहर किया जाता है, जिसने लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया है, तो ड्रेसिंग रूम में बातचीत मुश्किल हो सकती है। उन्होंने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अचानक बाहर नहीं किया जा सकता।

मुख्य कोच के अनुसार, पिछले डेढ़ से दो साल में जिस टीम संयोजन ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, उसे केवल कुछ मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। टीम प्रबंधन के लिए ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा, विश्वास और निरंतरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

एशियन गेम्स में भी चमके वैभव

वैभव ने एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंदों पर 38 रन की उपयोगी पारी खेली थी। हालांकि फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ वह 9 गेंदों पर 15 रन ही बना सके। इसके बावजूद भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

15 साल, छह महीने और छह दिन की उम्र में वैभव एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे युवा भारतीय भी बने। उन्होंने निशानेबाज सौरभ चैधरी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा, जिन्होंने 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में 16 साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीता था।

युवा सितारे को अभी लंबा सफर तय करना है

गंभीर की बातों से साफ है कि टीम प्रबंधन वैभव की प्रतिभा से प्रभावित है, लेकिन उनके चयन को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। 15 वर्षीय बल्लेबाज के सामने अभी लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर है। टीम प्रबंधन का जोर उन्हें धीरे-धीरे बड़े स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करने और सही समय पर पर्याप्त मौके देने पर दिखाई देता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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