जन्माष्टमी पर राधा बनीं हेमा मालिनी, : मंच पर बिखरा कृष्ण प्रेम का रंग, शास्त्रीय नृत्य में दिखी राधा-कृष्ण की प्रेम और भक्ति की मनमोहक कहानी

मुंबई। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और मशहूर नृत्यांगना हेमा मालिनी ने अपनी कला का एक बार फिर शानदार परिचय दिया। उन्होंने अपने चर्चित डांस बैले ‘राधा रास बिहारी’ की एक खूबसूरत झलक सोशल मीडिया पर साझा की। वीडियो में हेमा मालिनी राधा के रूप में पारंपरिक परिधान और आकर्षक आभूषणों से सजी नजर आ रही हैं। शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक मुद्राओं में उनका अंदाज दर्शकों का ध्यान खींच रहा है।
मंच पर साकार हुई राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी
वीडियो में हेमा मालिनी अपनी नृत्य मंडली के साथ मंच पर प्रस्तुति देती दिखाई देती हैं। वहीं एक कलाकार कृष्ण की भूमिका में नजर आता है। शास्त्रीय नृत्य के भाव, मुद्राओं और संगीत के जरिए राधा-कृष्ण के प्रेम, समर्पण और भक्ति को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।
प्रस्तुति की झलक साझा करते हुए हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में शांति, खुशियां और समृद्धि लेकर आए। उनका संदेश ‘राधे-राधे... जय श्री कृष्ण’ भी कृष्ण भक्ति से सराबोर नजर आया।

कृष्ण भक्ति से जुड़ा है भावनात्मक रिश्ता
‘राधा रास बिहारी’ हेमा मालिनी की चर्चित नृत्य प्रस्तुतियों में शामिल है। इसके जरिए वह राधा और कृष्ण के रिश्ते, प्रेम और आध्यात्मिक भावनाओं को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत करती रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक नृत्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति से जुड़ी भावनात्मक यात्रा है।
पांच साल की उम्र से शुरू हुआ नृत्य का सफर
हेमा मालिनी ने महज पांच वर्ष की उम्र में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया था। उनकी मां जया चक्रवर्ती ने बेटी की प्रतिभा को पहचाना और उनके नृत्य सफर में पूरा सहयोग दिया। छोटी उम्र से ही मंच पर प्रस्तुति देने वाली हेमा मालिनी ने आगे चलकर कुचिपुड़ी में भी प्रशिक्षण लिया। उन्होंने प्रसिद्ध गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी सीखी।
रेखा भी थीं उसी डांस क्लास का हिस्सा
हेमा मालिनी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अपने प्रशिक्षण के दिनों की दिलचस्प याद भी साझा की थी। उन्होंने बताया कि चेन्नई में जब वह नृत्य सीख रही थीं, तब अभिनेत्री रेखा भी उन्हीं कक्षाओं में आया करती थीं। हेमा के मुताबिक, बचपन में रेखा काफी शरारती थीं और कई बार अभ्यास के बीच से भाग जाया करती थीं।
नृत्य को बनाया संस्कृति से जोड़ने का माध्यम
हेमा मालिनी ने ‘दुर्गा’, ‘मीरा’, ‘रामायण’, ‘सावित्री’, ‘राधा कृष्ण’ और ‘राधा रास बिहारी’ जैसी प्रस्तुतियों के जरिए पौराणिक और आध्यात्मिक कथाओं को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से बड़े मंच तक पहुंचाया। जन्माष्टमी पर उनकी राधा-कृष्ण प्रस्तुति ने एक बार फिर उनकी कला और भक्ति के अनोखे संगम को सामने ला दिया।
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