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भारत-यूके एफटीए : द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद, आईटी पेशेवरों और उद्योग जगत के लिए खुलेंगे नए अवसर, कारोबार और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 15, 2026
10:59 AM
द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद, आईटी पेशेवरों और उद्योग जगत के लिए खुलेंगे नए अवसर, कारोबार और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते का उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके साथ ही भारतीय उत्पादों को दुनिया के सबसे बड़े और प्रीमियम उपभोक्ता बाजारों में से एक यूके में व्यापक पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को मिलेगी शुल्क मुक्त पहुंच

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। अब भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को यूके के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इसका मतलब है कि भारत के लगभग पूरे निर्यात मूल्य को शुल्क मुक्त व्यापार का लाभ मिलेगा।

अब तक जिन उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगता था, वे भी अब प्रतिस्पर्धी कीमतों पर ब्रिटेन पहुंच सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, भारत से निर्यात होने वाले प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर पहले 70 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, जो अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। इसी तरह सब्जियों पर 20 प्रतिशत तक, कपड़ा उद्योग पर 12 प्रतिशत तक तथा वाहन और परिवहन उपकरणों पर 18 प्रतिशत तक लगने वाला शुल्क भी अब शून्य हो गया है।

इसके अलावा रसायन, आभूषण, प्लास्टिक, रबर, घड़ियां और कई अन्य औद्योगिक उत्पादों को भी शुल्क मुक्त बाजार उपलब्ध होगा, जिससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

आईटी और पेशेवरों को मिलेगा बड़ा लाभ

यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय पेशेवरों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आया है। समझौते के तहत यूके ने भारतीय कर्मचारियों के लिए दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है।

इसका सीधा लाभ उन भारतीय कर्मचारियों को मिलेगा जो अस्थायी रूप से यूके में कार्यरत हैं। अब उन्हें भारत और यूके दोनों जगह सामाजिक सुरक्षा अंशदान नहीं देना पड़ेगा। सरकार का अनुमान है कि इससे 75 हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को फायदा होगा। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और परामर्श क्षेत्र की कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित

समझौते के दौरान भारत ने अपने कृषि और ग्रामीण हितों का भी विशेष ध्यान रखा है। डेयरी उत्पाद, फल, सब्जियां और खाद्यान्न जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और स्थानीय उद्योगों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

दूसरी ओर, भारत में ब्रिटेन के कुछ उत्पादों जैसे स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और सौंदर्य प्रसाधनों पर लगने वाले शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को भविष्य में इन उत्पादों की कीमतों में राहत मिल सकती है।

14 दौर की बातचीत के बाद मिली सफलता

भारत और यूके के बीच यह ऐतिहासिक समझौता 14 दौर की लंबी वार्ता के बाद 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित हुआ था। इसमें कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, डिजिटल कारोबार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, नवाचार, सतत विकास और सरकारी खरीद जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग, औद्योगिक नवाचार और रोजगार सृजन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और पेशेवरों के लिए यह समझौता वैश्विक बाजार में नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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