80 फाइटर जेट्स का तेहरान पर कहर : इजरायल के हमले से दहला ईरान, मिलिट्री और न्यूक्लियर साइट्स निशाने पर

यरूशलम-तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब और गहरा हो गया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले आठ दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बड़ा हवाई हमला किया है। इजरायली रक्षा बल के अनुसार, शुक्रवार तड़के इजरायली एयरफोर्स के 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने तेहरान के कई इलाकों में बमबारी की। इन हमलों का मुख्य निशाना ईरान की सैन्य क्षमताएं, नेतृत्व से जुड़े ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम से संबंधित बुनियादी ढांचा बताया गया है।
इजरायली सेना का कहना है कि इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें तेहरान स्थित इमाम हुसैन सैन्य विश्वविद्यालय भी शामिल है, जहां आईआरजीसी के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। आईडीएफ के मुताबिक हाल के दिनों में इस परिसर का इस्तेमाल आपातकालीन सैन्य संसाधन केंद्र और ऑपरेशन ‘राइजिंग लायन’ के दौरान आईआरजीसी के सभा परिसर के रूप में भी किया जा रहा था।
ईरान की मिसालइ यूनिट पर भी हमला
इसके अलावा इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान की मिसाइल यूनिट के एक बड़े भंडारण स्थल पर भी हमला किया। यह स्थल भूमिगत संरचना में बना हुआ था, जहां बैलिस्टिक मिसाइलों को संग्रहीत किया जाता था। सैन्य बंकर, कमान केंद्र और लॉन्चिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इस परिसर में बड़ी संख्या में ईरानी सैन्यकर्मी मौजूद थे। इजरायल का दावा है कि इस हमले से ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
लेबनान में भी तेजी से बढ़ रहा तनाव
उधर, लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। 2024 के संघर्ष विराम के बाद यह अब तक का सबसे भीषण हमला माना जा रहा है। बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में रॉकेट हमलों और हवाई हमलों के कारण हालात बिगड़ गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक करीब 95,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।
ट्रंप ने ईरान के सामने रखी शर्त
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य ईरान में मौजूदा शासन को कमजोर करना और वहां नया नेतृत्व स्थापित करना हो सकता है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव और बढ़ने की आशंका है।
संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो सकता है रूस
खुफिया सूत्रों के अनुसार रूस भी इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो सकता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस ने ईरान को ऐसी रणनीतिक जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले कर सकता है। इस बीच एक दुखद घटना में तेहरान के पास एक स्कूल में विस्फोट हुआ, जिसमें कई छात्रों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह विस्फोट पास स्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले का असर हो सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा युद्ध का असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी देशों से ऊर्जा निर्यात बाधित होता है तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो साल में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले और रूस-ईरान के बढ़ते सहयोग से यह संघर्ष और जटिल हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध रोकने की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। जैसे-जैसे लड़ाई तेज हो रही है, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।
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