यशस्वी-फर्नांडो पर चला आईसीसी का डंडा : जायसवाल के आउट होने के बाद हुआ था विवाद, दोनों पर लगा भारी भरकम जुर्माना

नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के पहले दिन मैदान पर हुई गर्मागर्म बहस अब कार्रवाई तक पहुंच गई है। भारतीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया है। दोनों खिलाड़ियों पर उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दोनों के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरिट अंक भी जोड़ दिया गया है।
विकेट के बाद बिगड़ा माहौल
विवाद भारतीय पारी के 17वें ओवर में उस समय शुरू हुआ, जब असिथा फर्नांडो ने यशस्वी जायसवाल को आउट कर दिया। विकेट हासिल करने के बाद मैदान का माहौल अचानक गर्म हो गया। पवेलियन लौट रहे जायसवाल और फर्नांडो के बीच कुछ बातचीत हुई, जिसने देखते ही देखते तीखे विवाद का रूप ले लिया।
दोनों खिलाड़ियों के बीच बढ़ती तनातनी कैमरों में भी कैद हुई। फर्नांडो ने आक्रामक अंदाज में अपना सिर जायसवाल की ओर बढ़ाया। जायसवाल ने भी पीछे हटने के बजाय उसी तरह प्रतिक्रिया दी। इसी दौरान दोनों के सिर आपस में टकरा गए। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच इस तरह का शारीरिक संपर्क क्रिकेट में गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है। घटना के बाद मामले को मैच अधिकारियों ने गंभीरता से लिया और इसकी जानकारी आईसीसी तक पहुंची।
आईसीसी ने सुनाया फैसला
आईसीसी ने दोनों खिलाड़ियों को आचार संहिता के अनुच्छेद 2.12 के उल्लंघन का दोषी माना। यह प्रावधान मैच के दौरान किसी खिलाड़ी, अंपायर, मैच रेफरी या अन्य व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से संबंधित है। जांच के बाद दोनों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। साथ ही दोनों खिलाड़ियों के खाते में एक-एक डिमेरिट अंक जोड़ा गया। हालांकि, यह दोनों के पिछले 24 महीनों में आचार संहिता से जुड़ा पहला अपराध है।
गलती मानी, सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी
कार्रवाई के बाद जायसवाल और फर्नांडो दोनों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। दोनों खिलाड़ियों ने एमिरेट्स आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट की ओर से सुनाई गई सजा को भी स्वीकार कर लिया। खिलाड़ियों के अपराध स्वीकार करने और प्रस्तावित दंड मान लेने के कारण मामले को आगे औपचारिक सुनवाई के लिए भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
क्रिकेट में गरमा-गरमी पर फिर सवाल
टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच आक्रामक प्रतिस्पर्धा और तीखी नोकझोंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन शारीरिक संपर्क को नियमों के तहत गंभीरता से लिया जाता है। कोलंबो टेस्ट में हुई यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि मैदान पर मुकाबला कितना भी कड़ा क्यों न हो, खिलाड़ियों को अपनी सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है।
आईसीसी की कार्रवाई से साफ है कि खेल के दौरान अनुशासन और खेल भावना से समझौता करने पर खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जा सकता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
