कंगाली की मार : पेट्रोल गायब, भोजन गायब, अब पाकिस्तान में इफ्तार पार्टियों पर भी बैन

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब पाकिस्तान की आम जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है। हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा की खपत कम करने और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों के कामकाज में बदलाव का ऐलान किया है। सरकार के फैसले के अनुसार देशभर में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया जाएगा, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। इससे छात्रों और स्टाफ की आवाजाही कम होगी और ईंधन की बचत हो सकेगी।
रोक से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी
इसके अलावा सरकार ने आधिकारिक डिनर और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। रमजान के दौरान आमतौर पर सरकारी और निजी संस्थानों में बड़े स्तर पर इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।
महंगाई ने तोड़ी जनता की कमर
इसी बीच रमजान के महीने में पाकिस्तान में महंगाई ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। पंजाब प्रांत में फल और सब्जियों की कीमतें सरकारी तय दरों से काफी ज्यादा पर बिक रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दर्जे के केले का सरकारी रेट 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति दर्जन तय किया गया था, लेकिन बाजारों में दुकानदार इसे 300 रुपये से कम में बेचने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह अमरूद, सेब और कंधारी अनार भी निर्धारित कीमतों से अधिक दरों पर बिक रहे हैं।
आयातित थाई अदरक की कीमतें आसमान पर
वहीं आयातित थाई अदरक, जिसकी आधिकारिक कीमत 280 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी, कई बाजारों में 350 रुपये तक पहुंच गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। चूंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए तनाव बढ़ते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सप्लाई प्रभावित होने से वहां फ्यूल संकट और महंगाई दोनों गहराते जा रहे हैं।
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