ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल! : ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल पर अमेरिकी रुख बदलेगा? ट्रंप का बड़ा इशारा

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति पर खतरे के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संकेतों ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या अमेरिका रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए कुछ देशों पर लगे ऊर्जा प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने पर विचार कर रहा है।
दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल उत्पादक देशोंकृजैसे फंजंत, ज्ञनूंपज और प्तंुकृने उत्पादन में कटौती के संकेत दिए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्यमें बाधा डालने की आशंका ने वैश्विक बाजार को और अस्थिर कर दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।
यह बोले ट्रंप
फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार तेल बाजार को स्थिर करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों को फिलहाल हटाया जा रहा है, ताकि तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित न हो। ट्रंप के मुताबिक, “दुनिया में तेल की कमी नहीं होने दी जाएगी।”
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों पर किए हमले
इसी बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें बहरीन के एक पेट्रोलियम परिसर को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है।
तेल बाजार में देखने को मिला तनाव का असर
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे तेल बाजार पर देखने को मिला। सोमवार को वैश्विक बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और यह 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। एक समय यह 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था। हालांकि बाद में ट्रंप के बयानों के बाद बाजार में कुछ राहत आई और कीमतें गिरकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।
रूस के तेल पर प्रतिबंध हटने से बाजार में बढ़ सकती है सप्लाई
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस के तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका आगे क्या फैसला लेता है और मध्य पूर्व का यह संघर्ष किस दिशा में जाता है।
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