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सारा दिन लैपटॉप पर बैठते हैं? : रीढ़ की जकड़न और थकान दूर करेगा ये योगासन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 29, 2026
08:20 AM
रीढ़ की जकड़न और थकान दूर करेगा ये योगासन

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों बैठे रहना, गलत पोस्चर और तनाव शरीर को जकड़ कर रख देता है। योग के विभिन्न आसनों में पूर्वोत्तानासन शरीर के अगले हिस्से को खींचता है और पिछले हिस्से को मजबूत बनाता है।

पूर्वोत्तानासन शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के तीन शब्दों से हुई है- 'पूर्व' (शरीर का अगला हिस्सा या पूर्व दिशा), 'उत्तान' (तीव्र खिंचाव), और 'आसन' (मुद्रा)। इसलिए इसे 'शरीर के अग्र भाग का तीव्र खिंचाव' या 'अपवर्ड प्लैंक पोज़' भी कहा जाता है। यह बैठकर आगे झुकने वाले आसनों (जैसे पश्चिमोत्तानासन) के प्रभाव को संतुलित करने के लिए एक बेहतरीन काउंटर-पोज है। इस आसन को अपवर्ड प्लैंक पोज भी कहा जाता है, जो शरीर के अगले हिस्से में गहरा खिंचाव पैदा करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तानासन के नियमित अभ्यास से हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं। वहीं, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बना रहता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करता है। पूर्वोत्तानासन थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करने में बहुत मददगार माना जाता है, और इसका कारण इसकी गर्दन और गले की मुद्रा में छिपा है। इस आसन को करने के दौरान गर्दन पीछे की ओर झुकती है, जिससे थायरॉयड ग्रंथि के आसपास रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। ज्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलने से ग्रंथि ज्यादा सक्रिय और संतुलित तरीके से काम करने लगती है।

यह आसन पैरों और कूल्हों के लिए भी कंप्लीट वर्कआउट है। पूर्वोत्तानासन को करने के दौरान एड़ियों को ज़मीन पर दबाकर पैरों को सीधा रखा जाता है। इससे पिंडलियों, जांघों के पिछले हिस्से और आगे के हिस्से में तेज खिंचाव और मजबूती आती है। जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं, उनके पैरों की जकड़न को यह आसन खोल देता है और पैरों में ताकत बढ़ाता है।

कूल्हों को ऊपर की ओर उठाकर रखने के लिए ग्लूट्स (नितंबों की मांसपेशियां) को पूरी तरह टाइट करना पड़ता है। इससे हिप्स शेप में आते हैं, हिप जॉइंट्स की अकड़न दूर होती है और कमर के निचले हिस्से को सहारा मिलता है। यह आसन हिप फ्लेक्सर्स को स्ट्रेच करता है, जो लगातार बैठने से टाइट हो जाते हैं। नियमित अभ्यास से पैरों में स्थिरता, कूल्हों में लचीलापन और पूरे लोअर बॉडी में मजबूती आती है। यदि आप योग की शुरुआत कर रहे हैं, तो इस आसन को करने से पहले अपनी कलाइयों को घुमाकर थोड़ा वॉर्म-अप अवश्य कर लें। गर्दन या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट (जैसे स्लिप डिस्क) होने पर सिर को पीछे न लटकाएं या इस आसन से बचें।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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