हाथों पर टिकेगा पूरा शरीर, मजबूत होगा संतुलन : जानिए बकासन करने का सही तरीका और इसके फायदे

नई दिल्ली। योग में कई ऐसे आसन हैं, जो शरीर को मजबूत बनाने के साथ संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बकासन ऐसा ही एक कठिन लेकिन लोकप्रिय आसन है। इसे अंग्रेजी में क्रो पोज कहा जाता है। शुरुआत में यह आसन चुनौतीपूर्ण लग सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का भार पैरों के बजाय हाथों पर संभालना पड़ता है। हालांकि, सही तकनीक और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे इसमें संतुलन बनाना सीखा जा सकता है।
हथेलियों की मजबूत पकड़ से करें शुरुआत
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, बकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर खड़े हों या बैठकर उकड़ू की स्थिति में आएं। इसके बाद दोनों हथेलियों को कंधों की चौड़ाई के आसपास जमीन पर मजबूती से टिकाएं। उंगलियों को अच्छी तरह फैलाकर रखें, ताकि हथेलियों का आधार मजबूत बने और शरीर का भार संभालने में आसानी हो। अब घुटनों को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए उन्हें ऊपरी बाजुओं के पास टिकाएं। इसके बाद कूल्हों को ऊपर उठाएं और शरीर का भार धीरे-धीरे पैरों से हटाकर हाथों की ओर ले जाएं।
एक-एक पैर उठाकर करें अभ्यास
बकासन में संतुलन बनाने के लिए शुरुआत में एक पैर को जमीन से उठाकर अभ्यास किया जा सकता है। जब शरीर का नियंत्रण बेहतर होने लगे तो दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाने का प्रयास करें। भुजाओं को यथासंभव सीधा रखें और कंधों को स्थिर बनाए रखें। इस दौरान शरीर को बहुत ज्यादा आगे या पीछे झुकाने से बचना चाहिए। शरीर का केंद्र हाथों के ऊपर संतुलित रखने की कोशिश करें। शुरुआत में कुछ सेकंड तक आसन में टिकना भी पर्याप्त है। अभ्यास बढ़ने के साथ समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
नजर सामने, सांस सामान्य रखना जरूरी
बकासन में आंखों की दिशा भी महत्वपूर्ण होती है। नीचे देखने के बजाय नजर सामने की ओर रखने से संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। उंगलियों को फैलाकर हथेलियों की पकड़ मजबूत रखें और पैरों को भी सक्रिय बनाए रखें। आसन करते समय सांस रोकने के बजाय सामान्य और नियंत्रित तरीके से सांस लेते रहना चाहिए। शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करना बेहतर रहता है।
हाथों से लेकर पेट की मांसपेशियों तक असर
बकासन के अभ्यास से कलाई, हाथ, कंधे और बाजुओं की मांसपेशियों पर काम होता है। इसके साथ ही पेट और कोर की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं। संतुलन आधारित होने के कारण यह आसन शरीर के नियंत्रण और एकाग्रता के अभ्यास में भी मदद कर सकता है।
नियमित अभ्यास के साथ व्यक्ति अपने शरीर के संतुलन को बेहतर तरीके से समझ पाता है और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। हालांकि, शुरुआती लोगों को इसे प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
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