बामुलाहिजा : कमाई किंग 'ड्राय', खजाने में 'खाई'!

संदीप भम्मरकर
सरकार का सबसे ‘लाडला कमाऊ पूत’ है आबकारी महकमा। लेकिन इस बार जैसे रूठकर कोने में बैठ गया है। मार्च खत्म, पर ठेके नहीं निपटे! हाल ये कि जिन दुकानों पर पहले बोली की बारिश होती थी, वहां अब सन्नाटा टपक रहा है। ठेकेदारों ने मिनिमम रेट पर भी हाथ खींच लिया, और महकमे को बार-बार टेंडर रीसेट करने पड़े। फिर भी कई दुकानें अनछुई पड़ी हैं। उधर सरकार माथा पकड़कर वजह खोज रही है कि कौन से नियम भारी पड़ गए जो मुनाफा हल्का हो गया? सियासी गलियारों में कानाफूसी तेज है कि कहीं ये ‘कमाई का इंजन’ पहली बार पटरी से तो नहीं उतर गया?
दफ्तर में किस्मत का डाउन नेटवर्क!
पीसीसी दफ्तर में सियासत के अलावा ‘वास्तु’ की चर्चाएं भी तेज़ हैं। कार्यकर्ता तो दशा-दिशा के साथ दरवाज़ों की आवाज़ पर भी गौर करने लगे हैं। कुछ का मानना है कि कुर्सी नहीं, कम्पास गड़बड़ है! सुरेश पचौरी से लेकर अरुण यादव, कमलनाथ और अब जीतू पटवारी तक सबने दरवाजे-दीवारें हिलाईं, पर सत्ता की चाबी जैसे ताला पहचानती ही नहीं या स्लिप हो जाती है। हाल ये कि बाहर खड़े कार्यकर्ता अब दफ्तर की “ऊर्जा” को तलाशते हैं। अंदर उम्मीद जगती है, बाहर आकर फिर फुस्स! सवाल तैर रहा है कि कहीं लोकेशन में ही ‘राजनीतिक ब्लैकहोल’ तो नहीं?
प्रेस कार्ड से प्रवक्ता कार्ड तक!
बीजेपी की नई मीडिया टीम आई है, और एंट्री ऐसी जैसे पूरा ‘स्टूडियो सीज़न’ लॉन्च हो गया हो! 89 चेहरों की फौज में नए-नवेले तेवर भी हैं और पुराने दिग्गजों की धार भी। विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री… सब अब टीवी डिबेट के रण में पार्टी की ढाल बनेंगे। दिलचस्प ट्विस्ट ये कि इनमें कई चेहरे ऐसे भी हैं, जिनके पास ‘अधिमान्य पत्रकार’ का टैग भी चमक रहा है। इसे ‘डबल रोल’ कह सकते हैं और पॉवर-पैक स्ट्रेटजी भी। लेकिन कांग्रेस के लिए स्क्रीन के ये धुरंधर टीवी स्टूडियों में धमक देने को तैयार हैं।
विधानसभा स्पीकर का 'मिस्ट्री मील'
विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर का पत्रकार भोज इन दिनों सियासी गलियारों में ‘मिस्ट्री मील’ बना हुआ है। न कोई खास मौका, न परंपरा… फिर भी न्योता ऐसा कि सब हाज़िर! खुद तोमर ने मुस्कुराकर कहा, “कोई वजह नहीं”, लेकिन पत्रकारों की रडार तो ‘नो वजह’ में ही वजह ढूंढने लगी। सियासत में वैसे भी दूर की चाल चलने वाले नेता बिना स्क्रिप्ट के कुछ करते नहीं। सीएम मोहन यादव भी शामिल हुए, गपशप और ठहाकों में तरबतर नजर आए। सवाल गर्म है कि ये सिर्फ भोज था या सियासत की धीमी आंच पर पकती कोई नई रेसिपी?
स्टेंडबाय मॉड में अफसर
मंत्रालय में इन दिनों फाइलें कम, फुसफुसाहट ज्यादा चल रही है। पांचवी मंजिल पर टॉप लेवल ट्रांसफर लिस्ट ऐसी अटकी है, जैसे लिफ्ट बीच मंजिल में रुक गई हो। अफसर काम से ज्यादा ‘अगली कुर्सी’ का नक्शा बना रहे हैं। लंबे फैसले टाले जा रहे हैं, क्योंकि पता नहीं कल डेस्क बदले या दफ्तर। अंदरखाने खबर है कि खाका तैयार है, बस आखिरी मुहर का इंतज़ार है। सबकी नजरें टिकी हैं मुख्यमंत्री की टेबल पर, जहां फाइल अभी भी ‘विचाराधीन’ है। सवाल तैर रहा है कि लिस्ट आएगी कब?
रील वाली मैडम पर रियल एक्शन!
इंस्टा पर रीलों से चमक बिखेरती आईपीएस मैडम को अब सीधे पीएचक्यू से ‘डिसिप्लिन डोज़’ मिला है। स्क्रीन पर स्वैग और ग्राउंड पर सख्ती... दोनों का कॉकटेल लंबे समय से सुर्खियां बटोर रहा था। फील्ड में तकरार, दुकानदारों से विवाद… सबने मिलकर फाइल को ‘ट्रेंडिंग’ बना दिया। इस बार एडीजी स्तर से सीधी चिट्ठी आई है, जिसमें अनुशासन की लाइनें मोटे अक्षरों में खींच दी गई हैं। अब देखना ये है कि मैडम का अगला रील क्या होगा—स्टाइल वही रहेगा या ‘सरकारी स्क्रिप्ट’ का नया फिल्टर लग जाएगा?
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