भारत में 25 करोड़ लोग हेल्थ कवर के दायरे में : केन्द्रीय मंत्री का दावा- 80 करोड़ को मिल रहा मुफ्त अनाज

नई दिल्ली । केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने दावा किया है कि भारत में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को हेल्थ कवर मिल रहा है। इतना ही नहीं औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026 पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कतरे हुए उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज भी उपलब्ध कराने का दावा किया। साथ ही मंडाविया ने यह भी बताया कि 10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में उनके बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपए मिलते हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा, आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने 2,000 रुपए, 1,500 रुपए या 1,200 रुपए जैसी रकम जमा करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय श्रम तौर-तरीकों एवं भारत की अपनी परंपराओं और प्रणालियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए कहा, जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं... तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढांचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएं और संबंधय तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।
भारत के आर्थिक संदर्भ को ध्यान में रखने की जरूरत
मांडविया ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में कई मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें भारत और विदेशों में विभिन्न मंचों और हितधारकों के साथ जुड़ने का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों के प्रति भारत के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय ढांचे और देश के अपने सामाजिक और आर्थिक संदर्भ, दोनों को ध्यान में रखने की जरूरत है। मंत्री के मुताबिक, श्रम क्षेत्र में नीतियां और व्यवस्थाएं तैयार करते समय अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के साथ-साथ देश की परिस्थितियों और सामाजिक ढांचे को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
सेस फंड के इस्तेमाल की समीक्षा करने के निर्देश
इससे पहले सितंबर में, मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे सेस फंड के मौजूदा इस्तेमाल का विस्तृत आकलन करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें।
श्रम संहिताओं के असर का व्यापक आकलन करने को कहा
मंत्री ने राज्यों से आगे कहा कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक साल बाद उनके असर का व्यापक आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां उन्हें और बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत हो सकती है। श्रम क्षेत्र से जुड़े इस आकलन का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और जहां जरूरत हो, वहां उनके क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने के उपाय तलाशना है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
