शिक्षा विभाग का ऐसा कारनामा : 43 लाख के घोटाले में जेल की हवा खा रहे शिक्षक को भेज दिया ट्रेनिंग का बुलावा, मचा हड़कंप

छिंदवाड़ा। मप्र अजब है...मप्र गजब है, यह स्लोगन शिक्षा विभाग के कारनामे पर पूरी तरह से फिट बैठ रहा है। ऐसा इसलिए की जो शिक्षक दो साल से जेल में बंद है, उसे ट्रेनिंग का बुलावा भेज दिया है। विभाग द्वारा इस तरह का आदेश जारी किए जाने के चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। मामला छिंदवाडा जिले के तामिया का है।
जानकारी के अनुसार, बीईओ कार्यालय की ओर से संकुल लहगड़ुआ में आयोजित सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची जारी की गई। इस सूची में चैथे क्रम पर हरिप्रसाद पंद्रे का नाम दर्ज है। हैरानी की बात यह है पंद्रे दो वर्षों से 43 लाख रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले में जेल में बंद है। इसके बावजूद उन्हें प्रशिक्षण में उपस्थित होने का निर्देश जारी कर दिया गया। आदेश पर बीईओ के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
पहले भी विवादों में रहा है संदीपनी विद्यालय
गौरतलब है कि तामिया का संदीपनी विद्यालय इससे पहले भी चर्चा में रह चुका है। हाल ही में विद्यालय में प्राचार्य पद के लिए महज एक दिन की अवधि वाला विज्ञापन जारी होने पर विवाद खड़ा हुआ था। अब जेल में बंद शिक्षक का नाम प्रशिक्षण सूची में शामिल होने से विभाग की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिक्षक और कर्मचारी भी इस चूक को लेकर हैरानी जता रहे हैं।
43 लाख के घोटाले में जेल में है मुख्य आरोपी
दरअसल, तामिया विकासखंड में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 43 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। जांच में सरकारी धन निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने का खुलासा हुआ था। तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर एक अधिकारी, एक सेवानिवृत्त कर्मचारी, दो बाबुओं समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले के मुख्य आरोपी हरिप्रसाद पंद्रे को निलंबित कर जेल भेजा गया था। आरोपियों से सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा चुकी है।
बीईओ ने दी सफाई, जांच के बाद सुधार का दावा
मामले पर बीईओ बी.के. सानेर का कहना है कि प्रशिक्षण सूची उनके कार्यालय ने तैयार नहीं की थी। उनके अनुसार यह सूची सिकल सेल विभाग की ओर से भेजी गई थी और उसी के आधार पर आदेश जारी किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है तथा यदि सूची में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना सत्यापन किए सूची पर हस्ताक्षर कर आदेश कैसे जारी कर दिया गया। इस लापरवाही के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
