भोजशाला पर फिर भड़का कानूनी संग्राम! : हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में खोला मोर्चा, दाखिल हुई नई याचिका

इंदौर। धार की बहुचर्चित भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब विवाद और तेज हो गया है। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए नया कानूनी दांव चल दिया है। पहले शहर काजी की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, वहीं अब कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस कदम के बाद भोजशाला विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
आज हो सकती है अहम सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई हो सकती है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिका में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की जा सकती है। दूसरी तरफ हिंदू पक्ष भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। उन्होंने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दी है, ताकि अदालत उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश या स्थगन न दे सके।
“700 साल से पढ़ी जा रही नमाज”: मुस्लिम पक्ष का दावा
कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि मुस्लिम समाज पिछले लगभग 700 वर्षों से इस परिसर में नमाज अदा करता आ रहा है। उनका दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड और खसरे में भी यह स्थल मस्जिद के रूप में दर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (।ैप्) पहले इस परिसर को कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है, लेकिन हालिया सर्वे रिपोर्ट में इसे मंदिर बताने की कोशिश की गई है।
एएसआई सर्वे पर उठाए गंभीर सवाल
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सर्वे रिपोर्ट तथ्यों के विपरीत तैयार की गई और हाईकोर्ट में भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अब सुप्रीम कोर्ट में वे इसी मुद्दे को मजबूती से उठाने की तैयारी में हैं।
फिर गरमाई सियासत और धार्मिक बहस
भोजशाला विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। हिंदू संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे अपने धार्मिक अधिकारों पर चोट बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का असर केवल भोजशाला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य धार्मिक विवादों पर भी पड़ सकता है।
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