"मोहब्बत" की कांवड़ यात्रा! : भोलेनाथ के दरबार में प्यार की अर्जी! 111 लीटर गंगाजल लेकर निकला प्रेमी जोड़ा

मुजफ्फरनगर | सावन का महीना... हर तरफ भगवा रंग, कंधों पर कांवड़ और जुबान पर "बोल बम" का जयघोष। लाखों श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं। कोई नौकरी की दुआ मांग रहा है, कोई परिवार की खुशहाली की, तो कोई अच्छी सेहत की कामना कर रहा है। लेकिन इस बार मुजफ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर एक ऐसी कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसकी मन्नत सबसे अलग है।
एक शादी में हुई मुलाकात... फिर शुरू हुई प्यार की कहानी
यह कहानी है मयंक और दीपिका की। मयंक खुर्जा के रहने वाले हैं, जबकि दीपिका बुलंदशहर की रहने वाली हैं। करीब एक साल पहले दोनों की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी। पहली मुलाकात दोस्ती में बदली और दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों ने अपने रिश्ते को शादी का नाम देने का फैसला किया, लेकिन परिवारों की सहमति नहीं मिल सकी। समझाने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन बात नहीं बनी।
जब परिवार नहीं माने... तो भोलेनाथ का दरवाजा खटखटाया
हर रास्ता बंद होता नजर आया तो दोनों हरिद्वार पहुंचे। वहां से 111 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई और पैदल यात्रा शुरू कर दी। उनकी सिर्फ एक ही मन्नत है कि दोनों परिवार उनकी शादी के लिए राजी हो जाएं।
111 लीटर गंगाजल... हर कदम पर विश्वास की परीक्षा
28 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा में दोनों रोज 15 से 20 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। कंधों पर भारी कांवड़, रास्ते में धूप, बारिश और थकान... लेकिन इन सबसे बड़ी उनकी उम्मीद है। मयंक का कहना है कि उन्होंने भोलेनाथ से सिर्फ यही प्रार्थना की है कि दोनों परिवार उनके रिश्ते को स्वीकार कर लें।
दीपिका की बस एक ही दुआ... हमारा घर बस जाए
दीपिका कहती हैं कि रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि भोलेनाथ उनकी प्रार्थना जरूर सुनेंगे। उनकी बस एक ही इच्छा है कि दोनों परिवार खुशी-खुशी उनकी शादी के लिए मान जाएं।
एक तरफ कांवड़... दूसरी तरफ रिश्ते की सबसे बड़ी परीक्षा
मयंक के परिवार को दोनों के रिश्ते की जानकारी है, लेकिन वे अभी शादी के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं दीपिका के परिवार को यह भी नहीं पता कि दोनों इस कांवड़ यात्रा में साथ चल रहे हैं। यानी एक तरफ 111 लीटर गंगाजल का भार है, दूसरी तरफ रिश्ते की चुनौती और तीसरी तरफ भोलेनाथ पर अटूट विश्वास।
रास्ते भर मिली दुआएं... "भोलेनाथ सबकी सुनते हैं"
मुजफ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर जैसे ही यह जोड़ा गुजरता है, लोग रुककर इन्हें देखते हैं। कोई वीडियो बनाता है, कोई तस्वीर खींचता है और जब उन्हें पता चलता है कि यह पूरी यात्रा शादी की मन्नत के लिए की जा रही है, तो कई लोग मुस्कुराते हुए कहते हैं, "भोलेनाथ सबकी सुनते हैं... तुम्हारी भी सुनेंगे।" कई श्रद्धालु इनके लिए जयकारे भी लगाते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं।
प्यार, आस्था और उम्मीद... जिसने सबका दिल जीत लिया
हर साल कांवड़ यात्रा में आस्था की कई अनोखी तस्वीरें सामने आती हैं। लेकिन इस बार मयंक और दीपिका की कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया। वे भगवान से कोई चमत्कार नहीं मांग रहे, बल्कि सिर्फ इतना चाहते हैं कि दोनों परिवार एक हो जाएं और उनका रिश्ता मंजिल तक पहुंच जाए।
कभी-कभी सबसे भारी कांवड़ 111 लीटर गंगाजल की नहीं होती... सबसे भारी कांवड़ होती है अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने की उम्मीद।
पलक गीते
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
