केरल विधानसभा चुनावः : रिजल्ट से पहले कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर छिड़ी जंग, कौन-कौन हैं दावेदार जानें सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक कर रहे शक्ति प्रदर्शन

केरल । केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को पूरा हो चुका है और परिणाम 4 मई को घोषित होंगे, लेकिन इससे पहले ही पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर खुली बहस शुरू हो गई है। संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की संभावित जीत की उम्मीदों के बीच मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर गुटबाजी अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।
कांग्रेस के अंदर शुरू हुई यह बहस अब सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। अलग-अलग गुट अपने-अपने नेताओं के समर्थन में अभियान चला रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं और अपने पसंदीदा नेताओं के पक्ष में आक्रामक तरीके से प्रचार कर रहे हैं। इससे यह मामला अब आंतरिक चर्चा से निकलकर एक बड़ा राजनीतिक तमाशा बनता जा रहा है।
कौन-कौन हैं सीएम पद के प्रमुख दावेदार?
इस सियासी खींचतान के केंद्र में तीन बड़े नाम हैंकृवी.डी. सतीशान, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला।
वेणुगोपाल गुट उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व से करीबी और रणनीतिक अनुभव के आधार पर मजबूत दावेदार बता रहा है।
सतीशान समर्थक उन्हें युवा और आक्रामक चेहरा मानते हैं, जिन्होंने वामपंथी सरकार के खिलाफ अभियान में ऊर्जा भरी।
चेन्निथला खेमा उनके अनुभव और वरिष्ठता को सबसे बड़ा आधार बता रहा है।
इन तीनों नेताओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने पार्टी के भीतर असहजता बढ़ा दी है।
चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने से बची थी कांग्रेस
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने जानबूझकर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया था, ताकि गुटबाजी चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित न करे। लेकिन अब मतदान खत्म होते ही यह संतुलन बिगड़ता दिख रहा है। दिल्ली स्थित पार्टी नेतृत्व भी इस खुली बयानबाजी से नाराज बताया जा रहा है। उच्च कमान ने साफ संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री का चयन तय प्रक्रिया के तहत ही होगाकृन कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक दबाव के आधार पर।
पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इस तरह की खींचतान मतदाताओं में भ्रम पैदा कर सकती है और चुनाव के दौरान बनाए गए एकता के संदेश को कमजोर कर सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर यूडीएफ सत्ता में आता है, तो सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक मतभेदों को जल्दी सुलझाकर एक मजबूत और एकजुट सरकार बनाना होगी।
सभी को शांत रहना चाहिए’ नेताओं की अपील
वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने इस विवाद को अनावश्यक बताते हुए सभी से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भी कहा कि मुख्यमंत्री के चयन की एक तय प्रक्रिया है और सही समय पर विधायक ही इस पर निर्णय लेंगे। फिलहाल, केरल की राजनीति में असली मुकाबला वोटों की गिनती से पहले ही शुरू हो चुका हैकृअब देखना यह है कि जनता का जनादेश किसके पक्ष में जाता है और कांग्रेस इस आंतरिक संघर्ष को कैसे संभालती है।
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