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टेलीग्राम पर कानूनी लड़ाई तेज : बैन के खिलाफ याचिका पर केन्द्र सरकार ने हाईकोर्ट में किया बड़ा दावा, पढ़ें क्या है पूरा मामला

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 18, 2026
11:15 AM
बैन के खिलाफ याचिका पर केन्द्र सरकार ने हाईकोर्ट में किया बड़ा दावा, पढ़ें क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। भारत में मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने अदालत में दावा किया है कि यह प्लेटफॉर्म आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध नेटवर्क के लिए सबसे सुविधाजनक माध्यम बनता जा रहा है। इसी बीच टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। कंपनी ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई जारी है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इस मामले में विस्तृत जवाब रजिस्ट्री में जमा कर दिया गया है। दस्तावेज रिकॉर्ड में आने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

सरकार बोली- टेलीग्राम को सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। कंपनी के तर्कों को सुनने के बाद उनकी जांच की गई और उसके निष्कर्ष भी रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। सरकार के अनुसार, पूरे मामले की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की।

इस दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि यदि सरकार आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करती है, तो संबंधित पक्ष को 48 घंटे के भीतर सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। इस पर सरकार ने कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

कोर्ट में उठे निजता और सुरक्षा के सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की बेंच ने पूछा कि क्या किसी व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए दूसरे लोगों के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है? इस पर सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित का हवाला दिया।

सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यदि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग होता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से टेलीग्राम के कथित बैकडेटिंग फीचर को लेकर चिंता जताई, जिसके जरिए संदेशों की तारीख और समय में बदलाव संभव बताया गया।

आखिर क्यों सरकार के निशाने पर आया टेलीग्राम?

सरकार का कहना है कि टेलीग्राम के कुछ फीचर्स ऐसे हैं, जिनसे उपयोगकर्ताओं की पहचान और गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। बिना मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए चैटिंग की सुविधा और अन्य गोपनीयता आधारित फीचर्स का दुरुपयोग साइबर अपराधी और ठग कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि हालिया विवादों और जांचों के बाद सरकार ने एहतियात के तौर पर इस प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वहीं कंपनी का कहना है कि किसी ऐप को बंद करने से सूचना लीक या अपराध पूरी तरह नहीं रुक सकते, क्योंकि ऐसे लोग दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

अब सभी की नजरें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो भारत में टेलीग्राम के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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