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जेन जी के प्रदर्शन पर सीजेआई ने दोहराई प्रतिबद्धता : पटना में बोले- शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में विरोध प्रदर्शन करना है अधिकार

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 26, 2026
11:15 AM
पटना में बोले- शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में विरोध प्रदर्शन करना है अधिकार

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर न्यायपालिका की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में विरोध प्रदर्शन करना अधिकार है। यदि ऐसे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से अनावश्यक या अत्यधिक कार्रवाई होती है, तो उसकी न्यायिक जांच की जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में भी पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन पर जोर दिया है।

विद्यार्थियों से खुलकर सवाल-जवाब

पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल-जवाब के खुले सत्र में हिस्सा लिया। छात्रों ने प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और न्यायपालिका से जुड़े कई मुद्दों पर सीधे सवाल पूछे।

शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवाल पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस को अत्यधिक बल प्रयोग का अधिकार नहीं मिल जाता। सर्वोच्च न्यायालय पहले भी कह चुका है कि शांतिपूर्ण और वैध विरोध संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है।

प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था में संतुलन पर जोर

सर्वोच्च न्यायालय ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को भी रेखांकित किया है। अदालत के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उचित स्थान और व्यवस्था होनी चाहिए, जबकि हिंसा या कानून का उल्लंघन करने वाले मामलों में प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

छात्रों के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप हाल के महीनों में भी सामने आया है। सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से संबंधित कई प्राथमिकी निरस्त कर दी थीं।

अलग राय सार्वजनिक करने पर भी सवाल

कार्यक्रम में एक विद्यार्थी ने न्यायाधीशों के बीच अलग राय होने के बावजूद उसे सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने ऐसी राय को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यावहारिक और व्यक्तिगत प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार किसी चयन प्रक्रिया में विचाराधीन व्यक्ति पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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