सीएम मोहन यादव ने किया ‘अत्रि’ परिसर का शिलान्यास : आईआईएसईआर भोपाल में 485 करोड़ से बढ़ेगी शोध की ताकत, 52 एकड़ में लेगा आकार

भोपाल। मध्य प्रदेश में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देने की दिशा में आईआईएसईआर भोपाल को बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल के विस्तारित परिसर ‘अत्रि’ का शिलान्यास किया। करीब 485 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होने वाला यह परिसर 52 एकड़ भूमि में आकार लेगा। यहां आधुनिक प्रयोगशालाओं, नवाचार पार्क और अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
उभरती तकनीकों पर होगा शोध
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अनुसंधान और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग से विकास को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार भी प्रदेश में सभी क्षेत्रों के शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि आईआईएसईआर भोपाल का नया परिसर शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यहां राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों में काम किया जाएगा, जिससे प्रदेश में विज्ञान आधारित नवाचार को नई दिशा मिलेगी।
पांच तकनीकी क्षेत्रों में बनेगा नया आधार
‘अत्रि’ परिसर में पांच प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों को केंद्र में रखकर अनुसंधान और कौशल विकास की गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इनमें क्वांटम एवं उन्नत सामग्री, ड्रोन तकनीक, टिकाऊ प्रणाली एवं तकनीक, चिकित्सा उपकरण एवं निदान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं रोबोटिक्स शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी काम किया जाएगा। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों पर प्रयोग करने तथा नवाचार विकसित करने के अवसर मिलेंगे।
स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का भी अनावरण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विस्तारित परिसर के लिए चिन्हित भूमि पर शिलापट्ट का अनावरण कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। उन्होंने परिसर में बरगद और पीपल के पौधे भी लगाए। इसके बाद आईआईएसईआर के मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्प अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और उसकी गौरवशाली परंपराओं से पूरी दुनिया को परिचित कराया। परिसर में उनकी प्रतिमा विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, युवा ऊर्जा और उत्कृष्टता की प्रेरणा देगी।
‘सप्त ऋषियों’ से की आईआईएसईआर की तुलना
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही शोध और ज्ञान की परंपरा रही है। आधुनिक दौर में देश में संचालित सात आईआईएसईआर संस्थान विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इन संस्थानों की तुलना ‘सप्त ऋषियों’ से करते हुए कहा कि आईआईएसईआर भोपाल नए शोध और नवाचार के माध्यम से ज्ञान की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के साथ तर्क, ज्ञान के साथ अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के साथ मानव कल्याण का उद्देश्य जुड़ा होना चाहिए। शोध का अंतिम लक्ष्य समाज और मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए।
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