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भारत की इकोनॉमी भरेगी ऊंची उड़ान! : वित्त वर्ष 2027 में 7.3% तक दौड़ सकती है अर्थव्यवस्था, निजी निवेश बनेगा विकास का नया इजन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 16, 2026
09:48 AM
वित्त वर्ष 2027 में 7.3% तक दौड़ सकती है अर्थव्यवस्था, निजी निवेश बनेगा विकास का नया इजन

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर गुड न्यूज सामने आई है। डेलॉइट इंडिया की जारी आर्थिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी डर 7.1 से 7.3 प्रतिशत रह सकती है। निजी निवेश में तेजी, घरेलू मांग की मजबूती और उद्योगों के बेहतर प्रदर्शन के दम पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।

हालांक बहुराष्ट्रीय पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉइट ने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार में व्यवधान आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के लिए जोखिम बने हुए हैं। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि को घरेलू खर्च में मजबूती और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से समर्थन मिला है। सड़कों, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है।

चार साल में सबसे तेज बढ़ा सकल स्थिर पूंजी निर्माण

डेलॉइट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार के अनुसार, हाल के आर्थिक संकेतक निजी निवेश गतिविधियों में तेजी आने की ओर इशारा कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले चार वर्षों में सबसे तेज वृद्धि बताई गई है। यह आंकड़ा कारोबारियों के बढ़ते भरोसे और नई उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में बढ़ती गतिविधियों को दर्शाता है।

सेमीकंडक्टर, रक्षा और एआई क्षेत्र पर रहेगा जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से आर्थिक विकास को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है। इन क्षेत्रों में शुरुआती पूंजी की जरूरत अधिक होती है, लेकिन ये लंबी अवधि में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के अवसर भी प्रदान करते हैं।

डेलॉइट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027-28 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.6 से 7 प्रतिशत के बीच रह सकती है। निजी पूंजीगत खर्च में निरंतर बढ़ोतरी से घरेलू मांग को मजबूती मिलने के साथ देश की उत्पादन क्षमता में विस्तार होने की संभावना है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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