बामुलाहिजा : चुनावी सियासत, भोपाल में हलचल, सत्ता के गलियारों की अंदरूनी कहानी

-संदीप भम्मरकर
नरोत्तम इफेक्ट, उड़ गई नींद
सियासत में एक टिकट कटता है, तो कई बंगलों की बत्तियां रातभर जलती हैं! दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भोपाल के सत्ता गलियारों में नई बेचैनी तैरने लगी है। जो वरिष्ठ नेता अब तक मंत्री, निगम-मंडल या नई जिम्मेदारी की आस लगाए बैठे थे, वे अब अपने राजनीतिक भविष्य का नया गणित बैठा रहे हैं। बंगलों पर स्टाफ की खुसुर-फुसुर तेज है। चर्चा है कि कहीं 'सम्मानजनक एडजस्टमेंट' की जगह 'सलीके से किनारा' करने का दौर तो शुरू नहीं हो गया? गलियारों में सवाल गूंज रहा है, आज नरोत्तम... तो कल किसका नंबर?
दतिया में सिंधिया का इम्तिहान
चुनाव में कभी-कभी उम्मीदवार से ज्यादा चर्चा प्रभारी की होती है। दतिया उपचुनाव में भले ही नरोत्तम मिश्रा मैदान में नहीं हैं, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री ने मुकाबले को हाईप्रोफाइल बना दिया है। ग्वालियर-चंबल की इस सीट से सिंधिया का पुराना सीधा जुड़ाव भले कम रहा हो, मगर इस बार जीत की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उनके कई पुराने समर्थक कांग्रेस में लौट चुके हैं, इसलिए हर सभा और हर मंच अब संदेश भी देगा और समीकरण भी। गलियारों में चर्चा है, दतिया में सिर्फ उम्मीदवार नहीं… सिंधिया का राजनीतिक असर भी वोटों में तौला जाएगा।
मंत्रीजी का 'ईमानदार' काउंटर
सियासत में ईमानदारी भी कई मॉडल में मिलती है। सरकार के एक मंत्री अपनी बेदाग छवि के लिए मशहूर हैं। कहते हैं, ज़रा-सी बेईमानी की बू आई नहीं कि मंत्रीजी फाइल से हाथ खींच लेते हैं। मगर ट्रांसफर सीजन में बने नजारे ने नयी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चर्चा है कि तबादला सीजन में मंत्रीजी के बेटे और उनके करीबी दोस्त का 'काउंटर' खूब सक्रिय रहा, जहां रुटीन से लेकर नॉन-रुटीन काम भी पूरे अनुशासन से निपटाए गए। शायद यही वजह है कि महकमे की ट्रांसफर लिस्ट पर ज्यादा रायता नहीं फैला। वैसे काउंटर इतना इफेक्टिव है कि सीजन भले खत्म हो जाए, काउंटर बंद नहीं होता।
कांग्रेस का विजयपुर दांव
जो दिखता है, वही पूरी कहानी नहीं होता। दतिया उपचुनाव में सुर्खियों की बाज़ी फिलहाल कांग्रेस के हाथ से फिसलती दिख रही है। पहले तीसरे उम्मीदवार की चर्चा, फिर बीजेपी के टिकट विवाद और उसके बाद अवधेश नायक की नाराज़गी ने सारा फोकस दूसरी तरफ मोड़ दिया। लेकिन अंदरखाने तस्वीर कुछ और बताई जा रही है। अंदर की खबर है कि दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने चुपचाप ‘विजयपुर फॉर्मूला’ लागू कर दिया है। ब्लॉक से लेकर पोलिंग बूथ तक दिग्गज नेताओं की तैनाती कर दी गई है। यानी क्या बीजेपी केवल शोर मचा रही है… और कांग्रेस ज़मीन पर शतरंज बिछा रही है?
पांचवें माले में मची हलचल
मंत्रालय के पांचवे माले में जब चहलकदमी बढ़े, समझ लीजिए खास फाइलें चल पड़ी हैं। पांचवें माले पर इन दिनों अहम पोस्टिंग की नई सूची को लेकर खासी हलचल है। चर्चा है कि इंदौर, उज्जैन, सिंहस्थ से जुड़े विभागों के साथ सीएम के करीबी माने जाने वाले कुछ अहम पदों पर भी बदलाव की तैयारी है। सीएम सचिवालय में भी नए चेहरों की एंट्री की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाईलेवल पर सीक्रेट मीटिंग्स का दौर शुरू हो चुका है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि दतिया का चुनाव निपटेगा… और अगस्त में कुर्सियों का नया खेल शुरू होगा।
प्रमोशन दौड़ में गृह पीछे
दस साल का जाम खुला, लेकिन एक महकमे की गाड़ी अब भी रेंग रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की पहल के बाद कई विभागों में प्रमोशन की फाइलें फर्राटा भरने लगी हैं। कहीं आदेश जारी हो चुके हैं, तो कहीं नई कुर्सियां भी संभाल ली गई हैं। लेकिन गृह विभाग अब भी सुस्त रफ्तार में दिखाई दे रहा है। सबसे निचले स्तर की सूची के बाद इंस्पेक्टर से डीएसपी पदोन्नति का इंतजार लंबा होता जा रहा है। चर्चा है, जिस महकमे ने कभी प्रभारी बनाकर रास्ता निकाल लिया था, वही अब फुल प्रमोशन की फाइल पर सबसे ज्यादा अटका हुआ है।
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