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भारत में जन्मी चीतों की पहली पीढ़ी ने लांघी सीमा : उत्साहित हुए विशेषज्ञ और अधिकारी, एनटीसीए ने कही यह बात

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Mar 09, 2026
12:14 PM
 उत्साहित हुए विशेषज्ञ और अधिकारी, एनटीसीए ने कही यह बात

श्योपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के बारां जिले तक पहुंचे दो चीतों की गतिविधियों ने वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों को उत्साहित कर दिया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए ) ने इसे चीतों का स्वाभाविक व्यवहार बताते हुए कहा है कि लंबी दूरी तय करना और नए क्षेत्रों की तलाश करना उनके प्राकृतिक स्वभाव का हिस्सा है।

जानकारी के अनुसार कूनो से बाहर निकलने वाले ये दोनों चीते केपी-2 और केपी -3 हैं। खास बात यह है कि ये भारत में जन्मी चीतों की पहली पीढ़ी के शावक हैं, जिनके माता-पिता वर्ष 2022 में अफ्रीका से भारत लाए गए थे। इन शावकों की यह लंबी यात्रा ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

केपी-20 राजस्थान के मंगरोल में किया गया ट्रैक

वन विभाग के अनुसार केपी-2 को राजस्थान के बारां जिले के मंगरोल रेंज में ट्रैक किया गया है, जबकि केपी-3 कूनो से लगभग 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर बांझ अमली संरक्षण रिजर्व तक पहुंच गया है। फिलहाल दोनों चीते पार्वती नदी के दोनों किनारों पर करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद बताए जा रहे हैं।

विशालकाय काॅरिडोर की योजना

एनटीसीए के अधिकारियों ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत पहले से ही कूनो से गांधी सागर तक एक बड़े अंतर-राज्यीय वन्यजीव कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। यह कॉरिडोर लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर के विशाल लैंडस्केप में फैला होगा, जिसमें राजस्थान के 7 और मध्य प्रदेश के 8 जिले शामिल हैं। चीतों की मौजूदा आवाजाही इस योजना के महत्व को और मजबूत करती है।

यह बोले विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगली जानवर अक्सर अपने लिए नए इलाकों और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इसलिए चीतों का दूसरे राज्य में जाना किसी असामान्य घटना के बजाय उनके प्राकृतिक व्यवहार का संकेत है।

चीतों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट मोड में राज्यों का वन अमला

इधर, चीतों की सुरक्षा को लेकर दोनों राज्यों के वन विभाग पूरी तरह सतर्क हैं। किशनगंज और अंता रेंज की फील्ड टीमें 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। जीपीएस और रेडियो कॉलर के जरिए चीतों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। छज्ब्। ने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा गया है ताकि चीतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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