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बांग्लादेश बॉर्डर पर हड़कंप! : चेकपोस्टों से अवैध घुसपैठियों की बाढ़, इनमें महिलाएं, पुरष और बच्चे सब

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May 26, 2026
09:35 AM
चेकपोस्टों से अवैध घुसपैठियों की बाढ़, इनमें महिलाएं, पुरष और बच्चे सब

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना और मालदा जिलों में भारत-बांग्लादेश सीमा के कई चेकपॉइंट्स पर मंगलवार सुबह अचानक हलचल बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हकीमपुर चेकपॉइंट पर सौ से अधिक लोग एकत्र हुए, जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। बताया जा रहा है कि ये लोग सीमा पार कर अपने देश वापस जाने की इच्छा जता रहे थे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई लोगों पर पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में कथित रूप से अवैध रूप से रहने का आरोप है। हाल के प्रशासनिक निर्देशों और कार्रवाई की चर्चाओं के बीच यह भीड़ चेकपॉइंट्स पर देखी गई, जिससे इलाके में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

नई नीति को लेकर सख्ती के संकेत

राज्य प्रशासन की ओर से विदेशी नागरिकों की पहचान और वापसी को लेकर हाल के दिनों में कई कदम उठाए गए हैं। कथित तौर पर “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” जैसी नीति पर चर्चा के बाद अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर पाए जाने वाले संदिग्ध लोगों को विदेशी नागरिक माना जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसी क्रम में पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।

होल्डिंग सेंटर की व्यवस्था शुरू

मालदा जिला इस दिशा में पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां होल्डिंग सेंटर शुरू किया गया है। इंग्लिश बाजार के चंदन पार्क इलाके में बनाए गए इस केंद्र में फिलहाल नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है, जिनमें महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य अस्थायी रूप से संदिग्ध प्रवासियों को रखना, उनकी पहचान की जांच करना और दस्तावेजों की पुष्टि करना है। यहां CCTV निगरानी, पुलिस बल और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं तैनात की गई हैं।

कानूनी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध व्यक्तियों को अधिकतम 30 दिनों तक होल्डिंग सेंटर में रखा जा सकता है। इस दौरान जिला प्रशासन उनकी पहचान, बायोमेट्रिक डेटा और रिकॉर्ड की जांच करता है। इसके बाद संबंधित डेटा केंद्रीय डेटाबेस में अपलोड किया जाता है और आगे की कार्रवाई तय की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में रहकर और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

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