आदिवासी हॉस्टलों में भोजन संकट, : सिंघार का सरकार पर तीखा हमला, 343 छात्रावासों में तीन महीने से राशन ठप

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर जनजातीय छात्रावासों में भोजन संकट को लेकर गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मप्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश के 343 जनजातीय छात्रावासों में पिछले तीन महीनों से गेहूं और चावल का नियमित आवंटन नहीं हुआ है। इस वजह से 22 हजार से अधिक आदिवासी छात्र-छात्राएं बुनियादी भोजन सुविधा से वंचित हैं और छात्रावास उधारी पर चलाए जा रहे हैं।
उमंग सिंघार के अनुसार मार्च, अप्रैल और मई में राशन की आपूर्ति पूरी तरह बाधित रही, जिससे 154 अनुसूचित जनजाति (एसटी) हॉस्टलों में लगभग 10 हजार और 189 अनुसूचित जाति (एससी) हॉस्टलों में करीब 12 हजार विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण बच्चों के सामने रोजमर्रा का भोजन संकट खड़ा हो गया है।
बच्चों को नहीं मिल रहा एक वक्त का भोजन
नेता प्रतिपक्ष ने तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार विज्ञापनों में आदिवासी हितैषी बनने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छात्रावासों में बच्चों को एक वक्त का भोजन भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार अपने ही छात्रावासों का पेट नहीं भर सकती, तो वह आदिवासी समाज के भविष्य की सुरक्षा कैसे करेगी।
सिंघार ने प्रशासनिक चूक मानने से किया इनकार
इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक चूक मानने से इनकार करते हुए सिंघार ने इसे आदिवासी समाज के साथ अन्याय करार दिया है। उनका कहना है कि यह स्थिति राज्य की प्राथमिकताओं और शासन व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है।
सरकार कर रही यह दावे
बता दें कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सरकार का दावा है कि वह आदिवासी वर्ग सहित सभी समुदायों के विकास के लिए लगातार योजनाएं चला रही है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर है और छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।
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