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अब बिना पर्चे के नहीं मिलेगी हाई-अल्कोहल मेडिसिन : दवाओं के दुरुपयोग पर सरकार का बड़ा कदम, टिंचर और हर्बल अर्क के दुरुपयोग से बढ़ी चिंता

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 10, 2026
08:49 AM
दवाओं के दुरुपयोग पर सरकार का बड़ा कदम, टिंचर और हर्बल अर्क के दुरुपयोग से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल वाली कुछ औषधीय तैयारियों की बिक्री और वितरण के नियमों को सख्त कर दिया है। अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेची जा सकेंगी और इनके निर्माण व बिक्री के लिए वैध लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य नशे के लिए इन उत्पादों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना और जरूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित तरीके से दवाएं पहुंचाना है।

मंत्रालय के अनुसार, इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधीय टिंचर (अर्क) जैसी कई तैयारियों को पहले ड्रग्स रूल्स की अनुसूची-के के तहत लाइसेंस संबंधी छूट प्राप्त थी। लेकिन इनमें से कई उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल मौजूद होता है, जिसके कारण कुछ लोग इनका इस्तेमाल नशे के विकल्प के रूप में करने लगे थे। कई राज्य सरकारों ने भी ऐसे मामलों को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष चिंता जताई थी।

अब इन दवाओं पर रहेगा कड़ा नियामकीय नियंत्रण

नई व्यवस्था के तहत 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग में उपलब्ध सभी औषधीय तैयारियों को अब अनुसूची-के की छूट नहीं मिलेगी। ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के लिए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत निर्धारित लाइसेंस लेना आवश्यक होगा।

इसके साथ ही इन दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इनकी बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही होगी और दवा विक्रेताओं को प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।

जनस्वास्थ्य की सुरक्षा पर सरकार का जोर

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि नए नियमों से अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगा। इससे इन दवाओं के दुरुपयोग की संभावना कम होगी, जबकि वास्तविक इलाज के लिए इनकी उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला दवा नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाने, औषधीय उत्पादों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस संबंध में सभी संशोधनों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के माध्यम से लागू कर दिया गया है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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