शनिवार, 23 मई 202608:18:10 PM
Download App
Home/देश

प्राइवेट स्कूल अब मनमाने ढंग से बढ़ा सकेंगे फीस : हाईकोर्ट के फैसले ने बढ़ाई अभिभावकों की टेंशन, डीओई की मंजूरी होगी अनिवार्य

admin

admin

May 23, 2026
07:55 AM
हाईकोर्ट के फैसले ने बढ़ाई अभिभावकों की टेंशन, डीओई की मंजूरी होगी अनिवार्य

नई दिल्ली। प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के ऐसे प्राइवेट स्कूल जो सरकारी सहायता प्राप्त नहीं करते, वे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अपनी फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय (डीओई) से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

सिर्फ सूचना देना होगा अनिवार्य

हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों को केवल फीस वृद्धि की जानकारी शिक्षा निदेशालय को देनी होगी। यानी अब स्कूलों को अनुमति लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, जिससे उनके प्रशासनिक अधिकारों में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई स्कूल बीच शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसके लिए डीओई की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

पुराने बकाया पर राहत, लेकिन नई चिंता

कोर्ट ने अभिभावकों को आंशिक राहत देते हुए यह निर्देश दिया कि स्कूल अब पुराने वर्षोंकृजैसे 2016-17 या उससे पहलेकृकी बढ़ी हुई फीस का बकाया वसूल नहीं कर सकेंगे। इससे उन अभिभावकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से बकाया मांगों से परेशान थे। लेकिन दूसरी ओर, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि स्कूलों की प्रस्तावित फीस वृद्धि अब अप्रैल 2027 से लागू मानी जाएगी, जिससे आने वाले वर्षों में शिक्षा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है।

सरकार के आदेशों पर लगा ब्रेक

हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय के उन सभी आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के प्रस्तावों को खारिज किया गया था। साथ ही कोर्ट ने क्व्म् के पास लंबित सभी फीस वृद्धि मामलों को भी समाप्त कर दिया।

‘लैंड क्लॉज’ पर भी सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने ‘लैंड क्लॉज’ के आधार पर स्कूलों के बीच किए जा रहे भेदभाव को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह शर्त केवल जमीन आवंटन पत्र तक सीमित है और इसे कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। शिक्षा विभाग अपनी कानूनी शक्तियों का दायरा इससे बढ़ा नहीं सकता।

स्कूलों की दलील और आगे की स्थिति

यह फैसला कई निजी स्कूलों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है। स्कूलों ने तर्क दिया था कि शिक्षा निदेशालय बार-बार फीस बढ़ोतरी के प्रस्तावों को खारिज कर रहा है, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। इस फैसले के बाद आने वाले समय में स्कूल फीस नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ सकता है।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें