शुक्रवार, 5 जून 202606:03:21 PM
Download App
Home/देश

एआई पर सीजेआई सूर्यकांत की लंदन से बड़ी चेतावनी : जवाबदेही टूटी तो न्याय व्यवस्था पर मंडराएगा संकट

admin

admin

Jun 05, 2026
10:23 AM
जवाबदेही टूटी तो न्याय व्यवस्था पर मंडराएगा संकट

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि यह तकनीक अब केवल कल्पना का विषय नहीं रही, बल्कि दुनिया की सबसे प्रभावशाली वास्तविकताओं में शामिल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस दशक में एआई को लेकर लिए गए फैसले यह तय करेंगे कि भविष्य में तकनीक, शक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के बीच संबंध कैसे होंगे।

ब्रिटेन के बर्कबेक, लंदन विश्वविद्यालय में आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि तकनीक अपने आप में न तो अच्छी होती है और न ही बुरी। उसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि समाज उसे किस कानूनी, राजनीतिक और नैतिक ढांचे के भीतर इस्तेमाल करता है।

शासन से लेकर युद्ध तक बढ़ रहा एआई का दखल

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एआई का प्रभाव अब शासन, व्यापार, संचार, सार्वजनिक प्रशासन और न्यायिक प्रक्रियाओं तक फैल चुका है। सरकारें कल्याणकारी योजनाओं के वितरण, आव्रजन मामलों के मूल्यांकन, सीमा सुरक्षा, वित्तीय निगरानी और पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में एल्गोरिदम आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि कई देश स्वायत्त सैन्य तकनीकों को विकसित कर रहे हैं, जबकि अदालतों को एआई से जुड़े साक्ष्यों, स्वचालित फैसलों और डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाओं जैसी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायपालिका के लिए अवसर भी, चुनौती भी

मुख्य न्यायाधीश ने माना कि यदि एआई का उपयोग जिम्मेदारी और मानवीय निगरानी के साथ किया जाए तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। कानूनी शोध, केस प्रबंधन, अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, दस्तावेजों के वर्गीकरण और न्यायिक मिसालों की पहचान जैसे कार्यों में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम लोगों की न्याय तक पहुंच मजबूत होगी।

अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने खड़े हुए नए सवाल

सीजेआई ने कहा कि पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय कानून क्षेत्रीय सीमाओं पर आधारित रहा है, लेकिन एआई इन सीमाओं को चुनौती दे रहा है। एआई मॉडल कई देशों के डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं और दुनिया के किसी भी हिस्से में प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में संप्रभुता, मानवाधिकार और जवाबदेही जैसे मौजूदा कानूनी सिद्धांतों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि एआई का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति से तय नहीं होगा, बल्कि मानवता के कानूनी और नैतिक निर्णय इसे दिशा देंगे। यदि एल्गोरिदम आधारित निर्णयों के दौर में जवाबदेही कमजोर पड़ गई, तो न्याय और उत्तरदायित्व की पूरी अवधारणा खतरे में पड़ सकती है।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें