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परिसीमन बिल पास कराने में कामयाब होगी सरकार! : शर्तें मानी गईं तो उद्धव गुट भी करेगा बिल का समर्थन, राउत ने दिए संकेत

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 16, 2026
10:11 AM
शर्तें मानी गईं तो उद्धव गुट भी करेगा बिल का समर्थन, राउत ने दिए संकेत

नई दिल्ली। लोकसभा में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार एक बार फिर परिसीमन महिला आरक्षण बिल पेश कर सकती है। इन बिलों पास कराने के लिए लोकसभा में दो तिहाई दरकार होगी। यानि सरकार को 360 वोटों की जरूरत पड़ेगी। अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान बिल पास न करा सकी सरकार इस बार अपने मकसद में कामयाबी होती दिख रही है। विरोधी पार्टियां बिलों को लेकर नरम रुख अपना रही हैं। शरद पवार की पार्टी एनसीपी के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) ने भी समर्थन के संकेत दे दिए हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी फिलहाल विधेयक का विरोध करेगी, लेकिन यदि विपक्ष की ओर से सुझाए गए आवश्यक संशोधनों को शामिल किया जाता है तो समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है। राउत ने नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि विधेयक इसी सत्र में पेश होगा या नहीं। जब विधेयक सदन में आएगा, तब सभी विपक्षी दल मिलकर इस पर चर्चा करेंगे और सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की चिंताओं को दूर करने वाले संशोधन किए जाते हैं तो समर्थन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रिया सुले भी जता चुकी हैं समर्थन की संभावना

इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले भी सरकार के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दे चुकी हैं। उनका कहना था कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का सिद्धांत अपनाया जाता है तो ऐसे प्रस्ताव का विरोध करने का कोई विशेष कारण नहीं होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय विपक्षी गठबंधन के सभी दलों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

सरकार आगामी मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

सदन के गणित पर सबकी नजर

लोकसभा में शिवसेना (उद्धव गुट) के अब केवल तीन सांसद शेष हैं। वर्ष 2024 के आम चुनाव में पार्टी के नौ सांसद चुने गए थे, लेकिन हाल ही में छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए। ऐसे में यदि शेष तीन सांसद भी सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं तो सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंचने में मदद मिल सकती है।

बीजेपी के मिशन-360 का टारगेट

लोकसभा में कुल 543 सीटें है, जिसमें से फिलहाल 3 सीटें खाली है. इस लिहाज से संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानि 360 सदस्यों के जरूरत होती है। अप्रैल में एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था। बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों के साथ-साथ डीएमके के 22 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलता है, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास फिलहाल लगभग 293 सांसद हैं। इसमें एनसीपीआई के 20 और डीएमके के 22 सांसद जुड़ते हैं, तो यह संख्या करीब 335 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा सरकार को समय-समय पर वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का भी समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है। हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद यदि इन्हें भी एनडीए के समर्थन में जोड़ा जाए तो गठबंधन की ताकत करीब 346 सांसदों तक पहुंच सकती है। शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद भी सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 354 सांसदों तक पहुंच सकता है। ऐसे में उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए केवल छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विभिन्न दलों के संभावित समर्थक सांसद सरकार के साथ आते हैं तो परिसीमन विधेयक पारित कराने का रास्ता काफी आसान हो सकता है। हालांकि कई दलों ने अभी तक अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है और सबकी निगाहें मानसून सत्र में होने वाली चर्चा और मतदान पर टिकी हुई हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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