मोहन सरकार की शिक्षा नीति पर उठे सवाल : कहीं एक शिक्षक के भरोसे 50 छात्र, कहीं 10 छात्रों पर तीन शिक्षक?

भोपाल। शिक्षकों के मनमाने तबादले, ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कतें और ट्रांसफर अधिकारों में बदलाव से घिरी सरकार; शिक्षा व्यवस्था पर विपक्ष और शिक्षकों के निशाने
शिक्षकों के असंतुलित वितरण पर सरकार घिरी
मध्यप्रदेश सरकार की शिक्षा नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में 50 से अधिक विद्यार्थियों की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है, जबकि कुछ स्कूलों में महज 10 छात्रों के लिए तीन-तीन शिक्षक तैनात हैं। ऐसे हालात सरकार के शिक्षक प्रबंधन और शिक्षा नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मनमाने तबादलों पर उठ रहे सवाल
शिक्षकों का आरोप है कि तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और कई स्थानों पर मनमाने ट्रांसफर एवं अटैचमेंट किए गए हैं। इसका असर स्कूलों में शिक्षकों के संतुलन पर पड़ा है। जरूरत वाले स्कूल खाली हैं, जबकि कुछ स्थानों पर आवश्यकता से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं।
ई-अटेंडेंस बनी नई परेशानी
सरकार ने जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू की, लेकिन तकनीकी समस्याओं ने इसे विवाद का विषय बना दिया है। सर्वर और नेटवर्क की दिक्कतों के कारण कई शिक्षकों की समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
डीईओ से अधिकार वापस, फैसलों पर सवाल
राज्य सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों से ट्रांसफर और अटैचमेंट के अधिकार वापस ले लिए हैं। सरकार इसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बता रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होगी और समस्याओं के समाधान में अधिक समय लग सकता है।
नीति पर उठ रहे बड़े सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है, तो सबसे पहले शिक्षकों का संतुलित वितरण, पारदर्शी तबादला व्यवस्था और तकनीकी खामियों का समाधान सुनिश्चित करना होगा। मौजूदा हालात में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या प्रदेश की शिक्षा नीति जमीनी जरूरतों के अनुरूप काम कर रही है या केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
आलोक त्रिपाठी
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