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महंगाई की मार : सितंबर में 11.39 फीसदी पर पहुंची दर, खाद्य पदार्थों से लेकर धातु और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट तक महंगाई का दबाव

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 14, 2026
08:32 AM
सितंबर में 11.39 फीसदी पर पहुंची दर, खाद्य पदार्थों से लेकर धातु और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट तक महंगाई का दबाव

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन के बीच के आम आदमी और उद्योग जगत के लिए चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों की मानें तो सिंतबर में महंगाई दर 11.39 फीसदी पर पहुंच गई है। जबकि अगस्त में यह 9.92 फीसदी पर थी। सभी वस्तुओं के लिए आॅल इंडिया होलसेल प्राइस इंडेक्स अगस्त के 110.8 से बढ़कर सितंबर में 112.5 हो गया है।

थोक कीमतों में आई यह अचानक तेजी मुख्य रूप से खनिज तेल, खाद्य वस्तुओं, कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस, कोयले, बुनियादी धातुओं और रसायनों के महंगे होने की वजह से देखी गई है। सितंबर के आंकड़ों में ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई सबसे अधिक रही। इस क्षेत्र में वार्षिक महंगाई दर अगस्त के 22.93 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 25.85 प्रतिशत पर पहुंच गई। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई भी 7.76 प्रतिशत से बढ़कर 8.67 प्रतिशत हो गई।

वहीं, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर अगस्त में 8.37 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 9.76 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि महंगाई का दबाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ रही हैं।

खाद्य महंगाई ने भी बढ़ाई चिंता

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का विषय बनी हुई है। डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक की वार्षिक महंगाई दर सितंबर में 8.66 प्रतिशत रही, जबकि अगस्त में यह 7.05 प्रतिशत थी। इस सूचकांक में प्राथमिक खाद्य वस्तुओं के साथ विनिर्मित खाद्य उत्पाद भी शामिल हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, खुदरा महंगाई पर वास्तविक प्रभाव का आकलन अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से किया जाता है।

कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों की लागत बढ़ी

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कोयला, खाद्य पदार्थ, धातुएं, रसायन, वस्त्र, रबर और प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने थोक महंगाई को ऊपर पहुंचाने में योगदान दिया। सितंबर में सभी वस्तुओं का संयुक्त थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 112.5 हो गया, जबकि अगस्त में यह 110.8 था। इसी तरह प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 120.3, ईंधन एवं ऊर्जा का 110.5 और विनिर्मित उत्पादों का 110.2 दर्ज किया गया।

उद्योगों पर भी बढ़ सकता है लागत का दबाव

उत्पादक मूल्य सूचकांक भी सितंबर में बढ़कर 112.5 पर पहुंच गया, जो अगस्त में 110.8 था। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र का प्रायोगिक इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक 106.1 दर्ज किया गया। लगातार बढ़ती थोक महंगाई से उद्योगों की लागत प्रभावित हो सकती है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, इसका वास्तविक असर बाजार की परिस्थितियों और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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