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मप्र में यूसीसी का रास्ता साफ : मोहन कैबिनेट ने अहम प्रस्ताव पर लगाई मुहर, अब राम-रहीम के लिए एक जैसा होगा कानून, ऐतिहासिक फैसले का साक्षी बना जगदीशपुर का चमन महल

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Jul 19, 2026
12:48 PM
मोहन कैबिनेट ने अहम प्रस्ताव पर लगाई मुहर, अब राम-रहीम के लिए एक जैसा होगा कानून, ऐतिहासिक फैसले का साक्षी बना जगदीशपुर का चमन महल

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गौंड वंश के ऐतिहासिक दुर्ग जगदीशपुर के चमन महल में आयोजित कैबिनेट की बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक रही। प्रदेश सरकार ने बहुप्रतीक्षित 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) 2026' को मंजूरी देकर इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके साथ ही कैबिनेट ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आठ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के लिए 776 करोड़ 13 लाख रुपए मंजूर किए गए।

यूसीसी को मिली कैबिनेट की मंजूरी, अब विधानसभा में होगी निर्णायक परीक्षा

कैबिनेट ने समानता और न्याय के सिद्धांत पर आधारित 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026' विधेयक को मंजूरी देते हुए इसे आवश्यक संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया पूरी कर विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग को अधिकृत किया। इस फैसले को प्रदेश सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी निर्णयों में माना जा रहा है।

राम और रहीम के लिए एक जैसा कानून'

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। उन्होंने कहा कि "राम और रहीम सबके लिए एक जैसा कानून होगा।" हालांकि, इस कानून के दायरे से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है।

लिव-इन संबंधों के लिए होंगे नए प्रावधान

प्रस्तावित विधेयक के तहत एक माह के भीतर लिव-इन संबंधों का पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा। ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाली संतान को उत्तराधिकार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यदि कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए लिव-इन संबंध में रहता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

विवाह और तलाक के नियम होंगे समान

यूसीसी के तहत विवाह से जुड़े प्रावधान सभी नागरिकों के लिए समान होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाह विच्छेद केवल मौखिक घोषणा से मान्य नहीं होगा, बल्कि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मान्यता मिलेगी।

इन आठ अहम विधेयकों पर भी लगी मुहर

कैबिनेट ने यूसीसी के अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी। इनमें मध्यप्रदेश निरसन विधेयक-2026, मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026, निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026, मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026, मध्यप्रदेश श्रम शक्ति संहिता (कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेसेज)-2026 तथा मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 शामिल हैं। इन सभी विधेयकों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

73 अस्पतालों का होगा विस्तार, गांव से शहर तक बेहतर इलाज

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन को मंजूरी दी। इसके तहत 29 उप स्वास्थ्य केंद्रों को 6 बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल तथा 7 संस्थाओं को 100 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर 776.13 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

1600 नए नियमित पद और आउटसोर्स भर्ती को भी मंजूरी

स्वास्थ्य संस्थाओं के विस्तार के साथ ही सरकार ने 1600 नियमित पदों, 71 संविदा पदों के सृजन और 560 कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन व्यवस्थाओं पर प्रतिवर्ष 122.83 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकार का दावा है कि इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेंगी।

स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और रोजगार पर सरकार का फोकस

कैबिनेट के फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार ने स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, उद्योग, निवेश, श्रम सुधार, अग्निशमन सेवाओं और सड़क अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की तैयारी कर ली है। निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में संशोधन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी देकर निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

इन फैसलों के साथ अब नजर आगामी विधानसभा सत्र पर रहेगी, जहां समान नागरिक संहिता सहित सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और अंतिम निर्णय होगा। यदि विधानसभा से मंजूरी मिलती है तो मध्यप्रदेश प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ेगा।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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