‘भारत की आवाज दबा नहीं सकते’ : छात्रों के मुद्दे पर राहुल का सरकार को सख्त संदेश, पीएम से सिपाही तक को मिलेगी सजा

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बंधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कान्फ्रेंस की। इस दौरान उनके साथ हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्र भी थे। राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनी और उनसे कहा कि वे अपने पास मौजूद वीडियो और दूसरे सबूत साझा करें। वहीं उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों तक को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सामूहिक आवाज को कोई नहीं दबा सकता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का विरोध किसी धर्म, जाति, महिला या पुरुष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की आवाज है। उन्होंने अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा कि इस आवाज के खिलाफ खड़ा होना उचित नहीं है। राहुल गांधी ने दावा किया कि कोई भी इस सामूहिक आवाज को दबा नहीं सकता।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत अपने पास सुरक्षित रखें तथा उन्हें उपलब्ध कराएं। राहुल ने कहा कि मामले के समाप्त होने पर इन सबूतों का इस्तेमाल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों तक की जवाबदेही तय करने की बात कही।
छात्र ने सुनाई कथित पिटाई की आपबीती
इस दौरान छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और बर्बरता करने के गंभीर आरोप लगाए। छात्रों ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लेकर बसों में भरा गया और थाने में ले जाकर पीटा गया। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकाया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया। धर्मेंद्र कुमार नाम के छात्र ने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित उत्पीड़न के बावजूद छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं और विरोध प्रदर्शन में फिर शामिल होंगे।
4 अक्टूबर से प्रदर्शन का दावा, हिरासत में मारपीट का आरोप
समर्थ नाम के एक अन्य छात्र ने बताया कि वे 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और 5 अक्टूबर को उन्हें हिरासत में लिया गया। उनके आरोप के मुताबिक, उन्हें संसद मार्ग पुलिस थाने ले जाया गया, जहां करीब 20 पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।
समर्थ ने दावा किया कि बाद में उन्हें पिछले रास्ते से बाहर निकालकर दिल्ली कैंट तक ले जाया गया और इस दौरान भी उनके साथ मारपीट हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक साथी के उल्टी आने की शिकायत करने पर पुलिसकर्मियों ने असंवेदनशील व्यवहार किया। फिलहाल, छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में निष्पक्ष जांच और सबूतों के आधार पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
प्रफुल्ल तिवारी
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