सपा के बिना रायबरेली भी नहीं जीत सकती कांग्रेस : राजनाथ सिंह ने राहुल को दिखाया आइना, आपातकाल-ईसी को लेकर भी घेरा

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चुबानी जंग अभी से तेज हो गई है। पक्ष-विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल पर बड़ा हमला बोला है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने यहां तक कह दिया कि सपा की समर्थन के बिना रायबरेली सीट भी जीत पाओगे या नहीं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के पुराने कार्यकाल, आपातकाल और चुनाव आयोग को लेकर भी घेरा।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ताकत पर उठाए सवाल
राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से राज्य की सत्ता से बाहर है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली में भी अपनी सीट जीत सकती है? इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने राज्य में कांग्रेस की चुनावी स्थिति और उसके सहयोगियों पर निर्भरता को लेकर निशाना साधा।
‘रिजीम चेंज’ के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में रिजीम चेंज जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे विपक्ष की मानसिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के बजाय उन्हें राजनीतिक टकराव में उलझा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने से देश की प्रगति प्रभावित हो सकती है।
आपातकाल का जिक्र कर राहुल गांधी पर निशाना
रक्षा मंत्री ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के इतिहास में ऐसे कई अध्याय हैं, जिन पर पार्टी को जवाब देना चाहिए। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर संविधान का इस्तेमाल राजनीतिक सुविधा के अनुसार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
चुनाव आयोग की नियुक्तियों पर कांग्रेस से मांगा जवाब
रक्षा मंत्री ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए वर्ष 1993 में आयोग की संरचना और दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी के उस पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की गई थी।
प्रफुल्ल तिवारी
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