आपातकाल के पाप पर पीएम मोदी का तीखा प्रहार : 51वीं बरसी बोले-- माथे पर लगा रहेगा संविधान की हत्या का कलंक

नई दिल्ली। आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर जोरदार हमला बोलते हुए 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाने वालों के माथे पर संविधान की हत्या का कलंक हमेशा बना रहेगा और देश को इस दौर की याद इसलिए रखनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सत्ता के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने की हिम्मत न कर सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर ‘संविधान हत्या दिवस’ हैशटैग के साथ जारी संदेश में कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि यह संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया और विरोध की हर आवाज को दबाने का प्रयास हुआ।
‘पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया था’
पीएम मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण के गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि मीसा जैसे कानूनों का दुरुपयोग कर लोगों को प्रताड़ित किया गया और उनके मौलिक अधिकार छीन लिए गए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं को जंजीरों में बांधा गया और कई लोगों को अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय ऐसा माहौल था कि हर नागरिक को डर रहता था कि पुलिस कभी भी उसे उठाकर ले जा सकती है।
‘मीडिया की आवाज दबा दी गई थी’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान मीडिया पर कड़ा नियंत्रण लगाया गया और प्रेस की स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को एक तरह से जेलखाने में बदल दिया गया था। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाई गई और सरकार के खिलाफ कोई भी खबर प्रकाशित नहीं होने दी जाती थी।
‘जनता ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया’
पीएम मोदी ने कहा कि तमाम दमन और अत्याचारों के बावजूद देश की जनता का लोकतंत्र से विश्वास नहीं टूटा। उन्होंने कहा कि जब चुनाव हुए तो लोगों ने जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर लोकतंत्र के पक्ष में मतदान किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुनः स्थापित किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के मतदाताओं की ताकत थी जिसने सत्ता के अहंकार को पराजित किया और लोकतंत्र को नई ऊर्जा दी।
‘इस काले दौर को याद रखना जरूरी’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल के पाप को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस दाग को बार-बार याद करने की जरूरत है ताकि देश में फिर कभी कोई व्यक्ति या सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का प्रयास न कर सके। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखने का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति समाज को सतर्क बनाए रखना है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
