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शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर संयम की जरूरत, : छात्र आंदोलन पर SC की सुरक्षा बलों को नसीहत, कहा- संवाद से सभालिए हालात, बल प्रयोग से नहीं

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 05, 2026
10:09 AM
छात्र आंदोलन पर SC की सुरक्षा बलों को नसीहत,  कहा- संवाद से सभालिए हालात, बल प्रयोग से नहीं

नई दिल्ली। राजधानी में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों को भी संयम और धैर्य का परिचय देना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि युवाओं से जुड़े मामलों में अधिकारियों को अत्यंत सावधानी से कदम उठाने चाहिए, क्योंकि आक्रामक कार्रवाई से हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं। इस मामले की याचिका को इसी विषय से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया गया है।

‘लोगों की बात सुनना ही सबसे बड़ी ताकत’

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी आंदोलन से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका बल प्रयोग नहीं, बल्कि संवाद है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी ताकत लोगों की बात सुनना और यह समझना है कि वे किस कारण आंदोलन कर रहे हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि कहीं तनाव की स्थिति बनती है तो उसका समाधान बातचीत और समझदारी से निकालने का प्रयास होना चाहिए, क्योंकि हिंसक प्रतिक्रिया केवल स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

युवाओं को चाहिए मार्गदर्शन, नहीं टकराव

अदालत ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश लोग युवा हैं और उन्हें कठोर कार्रवाई के बजाय उचित सलाह, मार्गदर्शन और परामर्श की आवश्यकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कुछ लोग भटककर अनुचित व्यवहार करते हैं, तब भी पहली कोशिश यह होनी चाहिए कि उनके असंतोष का कारण समझा जाए। अदालत के अनुसार, राज्य की ओर से अत्यधिक आक्रामक रवैया अपनाने से तनाव बढ़ सकता है और भविष्य में हिंसा की आशंका भी पैदा हो सकती है।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना एजेंसियों की जिम्मेदारी

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की है और ऐसे हालात से कैसे निपटना है, इसका अंतिम निर्णय वही लेंगी। अदालत ने माना कि सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसे मामलों से निपटने का अनुभव और विशेषज्ञता होती है, लेकिन उनसे अपेक्षा है कि वे संयम और संतुलन के साथ कार्रवाई करें।

याचिका में कार्रवाई की मांग

याचिका में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के आयोजकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले कुछ युवाओं से सात दिन की सामुदायिक सेवा कराने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान अनुशासनहीनता पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में यह गलत संदेश दे सकती है। वहीं सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और कानून-व्यवस्था, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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