खुलते ही बिखरा बाजार: : सेंसेक्स 900 अंक टूटा, निफ्टी 23,250 के नीचे फिसला, आईटी शेयरों में मची भगदड़, निवेशकों के उड़े होश

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार को बुधवार को कारोबारी शुरुआत में ही बड़ा झटका लगा। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत भी घरेलू निवेशकों का भरोसा नहीं बचा सके और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों की संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,649.84 अंक के मुकाबले कमजोर शुरुआत करते हुए 74,507 पर खुला। इसके बाद बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि कुछ ही देर में यह करीब 900 अंक टूटकर 73,759 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 23,483 के पिछले बंद स्तर से फिसलकर 23,415 पर खुला और देखते ही देखते 23,250 के नीचे पहुंच गया।
आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा तबाही
बाजार की इस तेज गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में शानदार तेजी दिखाने वाले आईटी शेयरों में बुधवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। टीसीएस का शेयर करीब 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि टेक महिंद्रा में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयर भी 3 प्रतिशत तक लुढ़क गए।
मिडकैप आईटी कंपनियां भी दबाव से नहीं बच सकीं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स करीब 5 प्रतिशत, एमफैसिस 3 प्रतिशत और कोफोर्ज लगभग 3 प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करते दिखाई दिए। एक दिन पहले जिस सेक्टर ने बाजार को मजबूती दी थी, वही अगले दिन गिरावट का सबसे बड़ा कारण बन गया।
क्यों आया बाजार में भूचाल?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में इस अचानक आई गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी लौटने लगी है। कुछ दिनों की नरमी के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं।
दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी फंडों के निकलने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और इसका सीधा असर शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर देखने को मिल रहा है।
आगे क्या रहेगी बाजार की दिशा?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम नहीं होती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर रोक नहीं लगती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जल्दबाजी में निवेश संबंधी फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।
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