हाकी विश्व कप का आगाज आज : 5 दशक का सूखा खत्म करने मैदान में उतरेगी टीम इंडिया, कप्तान हरमनप्रीत और कोच फुल्टन के सामने इतिहास बदलने की चुनौती

एम्स्टेलवीन (नीदरलैंड्स)। आज से हाॅकी विश्व कप का आगाज होने जा रहा है। भारत अपने अभियान का शुरुआत वेल्स के खिलाफ करेगा। मैच शाम 4. 30 बजे से शुरु होगा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम 51 साल से चले आ रहे विश्व कप खिताब के इंतजार को खत्म करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। नीदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत की नजर खिताब पर है। भारत ने आखिरी बार 1975 में विश्व कप जीता था। इसके बाद टीम पोडियम तक भी नहीं पहुंच सकी।
भारतीय टीम वेल्स के खिलाफ अब तक कोई मुकाबला नहीं हारी है। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह 220 इंटरनेशनल गोल कर चुके हैं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और मुख्य कोच क्रेग फुल्टन की अगुवाई में भारतीय टीम इस लंबे इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगी। पेरिस ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाले फुल्टन के सामने इस बार चुनौती और बड़ी है। प्रतियोगिता में दुनिया की 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं और नया प्रारूप भी टीमों की परीक्षा लेगा।
पाकिस्तान, इंग्लैंड और वेल्स से होगी टक्कर
भारत को पूल डी में रखा गया है। इस समूह में उसके साथ वेल्स, इंग्लैंड और चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान हैं। प्रत्येक टीम अपने समूह की बाकी तीन टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेगी। शीर्ष दो टीमें अगले दौर में पहुंचेंगी।
बाकी समूहों में पूल ए में नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड और जापान हैं। पूल बी में बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस और मलेशिया हैं, जबकि पूल सी में ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
अनुभव और युवा जोश से सजी टीम
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने पिछले दो वर्षों से साथ काम कर रहे खिलाड़ियों के समूह पर भरोसा जताया है। हरमनप्रीत लगातार दूसरे विश्व कप में कप्तानी करेंगे। मंदीप सिंह और मनप्रीत सिंह चैथी बार विश्व कप खेलेंगे। वहीं मोहित एचएस, सूरज करकरा, यशदीप सिवाच, आदित्य अर्जुन लालगे, राजिंदर सिंह, जुगराज सिंह, संजय और शिलानंद लाकड़ा पहली बार विश्व कप में उतरेंगे।
हालिया प्रदर्शन सबसे बड़ी चिंता
विश्व कप से पहले भारतीय टीम की हालिया लय चिंता का विषय है। भारत विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर है। प्रो लीग सत्र में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह अंक तालिका में दूसरे आखिरी स्थान पर रही।
हालांकि यूरोप में भारत ने नीदरलैंड्स, जर्मनी और पाकिस्तान को हराया। इंग्लैंड के खिलाफ भी भारतीय टीम ने रोमांचक मुकाबला जीतकर आत्मविश्वास हासिल किया। इन परिणामों से टीम को बड़ी प्रतियोगिता से पहले मनोबल मिला है।
हरमनप्रीत के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
भारत की सबसे बड़ी ताकत कप्तान हरमनप्रीत सिंह का पेनल्टी कॉर्नर पर प्रहार है। उनकी ताकतवर ड्रैग फ्लिक बड़े मुकाबलों का रुख बदल सकती है। हालांकि हालिया मुकाबलों में उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। यूरोप में पिछले आठ मुकाबलों में वह केवल एक गोल कर सके।
अभिषेक, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह और मंदीप सिंह जैसे खिलाड़ियों से भी गोल करने की बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर अभिषेक फील्ड गोल के मामले में भारत के अहम हथियार बनकर उभरे हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
