परिसीमन विधेयक पर पवार की पार्टी का बदला मन : फैसले से विपक्ष को लगेगा जोर का झटका

मुंबई। संसद में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले वरिष्ठ नेता शरद पवार पार्टी एनसीपी (एसपी) ने अपने सहयोगी दलों को जोर का झटका देते हुए विधेयक को समर्थन सरकार के साथ खड़े होने का का फैसला किया है। एनसीपी का यह फैसला विपक्ष के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
बदल सकते हैं संसद के अंकगणित
बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) अब तक विपक्ष के प्रमुख दलों में शामिल रही है। ऐसे में परिसीमन विधेयक पर उसका समर्थन सरकार के लिए अहम साबित हो सकता है। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी की नई रणनीति मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे केंद्र के साथ सहयोगात्मक रुख के संकेत के रूप में देख रहे हैं। इस फैसले का असर केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
पहले नहीं मिल पाया था पर्याप्त समर्थन
इसी वर्ष अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किया गया था। उस समय विपक्ष ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे, जबकि इसे पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका था। अब यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) समर्थन देती है तो संसद में इस विधेयक को लेकर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
क्या है परिसीमन विधेयक
परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। यह प्रक्रिया नवीनतम जनगणना के आधार पर होगी, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी आबादी के अनुरूप सीटों का आवंटन किया जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 815 तक बढ़ाई जा सकती है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान किया गया है। इस तरह लोकसभा की कुल संभावित सदस्य संख्या 850 तक पहुंच सकती है।
पुरानी व्यवस्था में बदलाव की तैयारी
वर्तमान में लोकसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर लागू व्यवस्था के अनुसार है। सरकार का कहना है कि देश की जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव के बावजूद लंबे समय से परिसीमन नहीं हुआ है। नए विधेयक के लागू होने पर परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जो जनसंख्या के अनुपात में नए संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का निर्धारण करेगा।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
